हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बीच एक बार फिर सीमा विवाद ने तूल पकड़ लिया है। यमुना नदी पर बने पुल से सटे एक कच्चे रास्ते को लेकर दोनों राज्यों के प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं। सीमा क्षेत्र में नए पिलर लगाए जाने के प्रयास से स्थिति शुक्रवार को उस समय तनावपूर्ण हो गई जब मौके पर दोनों प्रदेशों के अधिकारियों के बीच तल्खी देखने को मिली।
हरियाणा प्रशासन की ओर से एसडीएम प्रदीप कुमार और खनन अधिकारी विनय शर्मा दलबल के साथ निशानदेही को लेकर विवादित स्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने सीमांत भूमि पर हरियाणा का दावा जताते हुए मौके पर निशानदेही की कार्रवाई शुरू करवाई। हरियाणा प्रशासन की इस कार्रवाई की सूचना मिलते ही उत्तर प्रदेश प्रशासन हरकत में आ गया। यूपी की ओर से तहसीलदार ललिता चौधरी पुलिस टीम के साथ यमुना नदी के किनारे पहुंचीं।
मौके पर दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच काफी देर तक सवाल-जवाब और बहस चलती रही। उत्तर प्रदेश प्रशासन का कहना था कि सीमा निर्धारण सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के आधार पर किया जाना चाहिए और जब तक दोनों राज्यों की संयुक्त टीम द्वारा निशानदेही नहीं हो जाती, तब तक सीमा पिलर लगाया जाना उचित नहीं है। वहीं हरियाणा प्रशासन अपने दावे पर अड़ा रहा। इसी दौरान कुछ लोगों द्वारा यमुना नदी में पिलर लगाने का प्रयास किया गया, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति और बढ़ गई। हालात को बिगड़ता देख दोनों राज्यों के पुलिस अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया और पिलर लगाने की कार्रवाई पर रोक लगा दी। मामले की सूचना उच्च अधिकारियों को दे दी गई।
यमुना नदी के पुल से सटा है एक रास्ता
बताया जा रहा है कि यह सीमा विवाद यमुना नदी के पुल से सटे एक रास्ते को लेकर उत्पन्न हुआ है। इस रास्ते का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश के रेत खनन ठेकेदार ट्रकों की आवाजाही के लिए करते हैं। हरियाणा के खनन ठेकेदारों का आरोप है कि यह रास्ता हरियाणा क्षेत्र में आता है और अवैध रूप से यूपी के ट्रक इसका उपयोग कर रहे हैं, जिसको लेकर लगातार शिकायतें की जा रही थीं। सीमा विवाद के स्थायी समाधान के लिए सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के आधार पर संयुक्त निशानदेही कराए जाने की बात कही जा रही है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार का टकराव न हो।
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