डांस के फ्लोर पर पूर्व विधायकजी को तान चढ़ गई। लाल चश्मा लगाकर ऐसा नाचे कि संभालना पड़ गया। छात्र नेता से नेता बनने की राह पर अग्रसर युवा नेताजी का ‘सफेद घोड़ा’ चर्चा में है। बालिकाओं के लिए बने सरकारी छात्रावास में फलता-फूलता पापड़-मंगोड़ी का बिजनेस पकड़ा गया और अमृता हाट में जिलाध्यक्ष और विधायक ने स्टॉल वाले को ‘सक्सेस मंत्र’ दे दिया। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में…
1. पूर्व विधायक का सुपर-डुपर डांस
पूर्व विधायक जी ने पचरंगी पगड़ी पहनी। लाल चश्मा लगाया। बंद गले का जोधपुरी जामा पहन लिया।
जैसलमेर में नए साल के जश्न में पूर्व विधायक जी को आमंत्रित किया गया था। कुछ देर तक तो सब कुछ सामान्य रहा।
लेकिन जैसे ही डीजे वाले ने ‘तेजल सुपर-डुपर’ गीत चलाया, पूर्व विधायक जी पर तान चढ़ गई।
तान ऐसी चढ़ी कि मंच पर बीचों-बीच पहुंच गए। हाथों से खूब लटके-झटके दिए। लाल चश्मे के कारण सारी दुनिया पर लालिमा छा गई थी।
पूर्व विधायक जी को याद आया कि PCC चीफ महोदय इसी गीत पर खूब गमछा घुमाते हैं। उन्होंने गमछे की डिमांड कर दी। मौके पर ही गमछे का इंतजाम हो गया।
गमछा गीत के तेज बीट के साथ कॉम्पिटिशन करते हुए घूमने लगे। पूर्व विधायक जी ने इतना जोर लगाया कि नाचते-नाचते उकड़ू बैठने की कोशिश की तो पीछे लुढ़क गए। साथियों ने संभाल लिया।
जोश यहीं ठंडा नहीं हुआ। आगे का डांस घुटनों पर बैठकर पूरा किया। हालांकि गीत खत्म होते-होते साथियों से कहा-अब उठा लो भई। साथियों ने उन्हें पैरों पर खड़ा किया।
जैसलमेर में पूर्व विधायक रूपाराम धनदेव ने तेजल सुपर डुपर गीत पर जमकर डांस किया था।
2. पूर्व छात्र नेता का ‘सफेद घोड़ा’
अरावली बचाने के लिए पूर्व छात्र नेता ने कारवां निकाला था। हजार किलोमीटर चलना था, लेकिन मामला बीच में ही ठंडा हो गया और उनके किसी मुकाम पर पहुंचने से पहले फिलहाल अरावली बच गई।
इस दौरान वे सफेद घोड़ी पर भी बैठे थे। सफेद घोड़ी ने जैसा स्टंट दिखाया, वह नेताजी के मन को भा गया। नेताजी ने उसी दिन तय किया कि अब ‘सफेद घोड़ा’ लाना है और खूब स्टंट दिखाना है।
और आखिरकार नेताजी सफेद घोड़ा ले आए। यह कोई जानवर नहीं है। इसका नाम वेलफायर है। यह एक कार है। इसकी कीमत डेढ़ करोड़ बताई जा रही है।
शोरूम के सामने ही नेताजी के समर्थकों ने आसमान को तिरंगे गुब्बारों से पाट दिया। लाल कपड़ा हटाया तो सफेद कार देख नारेबाजी होने लगी।
नेताजी कार में घर गए और नारियल तिलक की रस्म करवाई। इसके बाद सोशल मीडिया की नदी में सफेद कार की रीलें बहने लगीं। अगली बार अगर अरावली पर संकट आया तो नेताजी ‘सफेद घोड़े’ पर बैठकर इसे बचाने निकलेंगे।

पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष निर्मल चौधरी सफेद रंग की वेलफायर कार में। तस्वीर जयपुर की है।
3. गर्ल्स हॉस्टल में पापड़ की फैक्ट्री
जिसे देखो वह समाज का उत्थान करने के लिए आमादा है। पूर्ववर्ती सरकार को लगा कि एक साथ दो घरों को शिक्षित करने का शॉर्टकट है बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना।
उन्होंने बालिका शिक्षा पर जोर दिया। फिर किसी ने कान में फुसफुसाया- सर, बालिका शिक्षा तब बेहतर होगी जब समाज की बालिकाओं को सरकारी छात्रावास मिलेंगे।
ताकि वह गांव से निकलकर शहरों में जाकर छात्रावास में रहे और उच्च शिक्षा ग्रहण कर दो घरों को रोशन करने की तैयारी कर सकें।
बात पूर्ववर्ती सरकार को जंच गई। उन्होंने तुरंत जोधपुर शहर के एक हिस्से में ज्योतिबा फुले नामक बालिका छात्रावास का शिलान्यास कर दिया और काले मार्बल पर सुनहरी अक्षरों में अपना नाम छपवा लिया।
एक सप्ताह पहले एक उत्सुक व्यक्ति छात्रावास की तरफ गया तो वहां पापड़-मंगोड़ी का कारखाना चल रहा था। एक कामगार आराम की मुद्रा में था। उत्सुक व्यक्ति ने वीडियो बनाते हुए आसमान सिर पर उठा लिया।
वीडियो सामने आया तो प्रशासन की एक टीम मौके पर पहुंची। लेकिन मौके पर पहुंचने की स्पीड इतनी कमजोर रही कि कारखाना पूरी तरह समेट लिया गया।
अफसरों ने निरीक्षण के बाद जो रिपोर्ट जारी की, उसपर लिखा था- मौके पर कोई कॉमर्शियल गतिविधि नहीं मिला।
लगता है कुछ लोग पापड़-मंगोड़ी के कारोबार के जरिए समाज की बालिकाओं का उत्थान करने पर आमादा थे। यह भी नेक काम ही था। फिर भाग क्यों गए?

जोधपुर में माता का थाना इलाके में ज्योतिबा फूले छात्रावास में पापड़-मंगोड़ी का कारखाना और आराम करता कामगार। यह वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है।
4. चलते-चलते..
अगर जावेद अख्तर किसी पार्टी विशेष के सदस्य होते तो सिलसिला फिल्म का यह गीत कुछ इस प्रकार होता- देखा एक ख्वाब तो ये सिलसिले हुए, दूर तक निगाह में हैं कमल के फूल खिले हुए…
लेकिन बात जावेद अख्तर साहब की नहीं है। बात है बाड़मेर भाजपा जिलाध्यक्ष अनंतराम विश्नोई की। वे भाजपा विधायक आदूराम मेघवाल के साथ अमृता हाट में पहुंचे थे।
वहां स्वयं सहायता समूह के घरेलू आइटम की दुकान पर दोनों रुके। दुकान दुपट्टा, पटका, थैला, चटाई आदि आइटम से अटी थी।
जिलाध्यक्ष महोदय ने एक पटका उठाया। उसे गौर से देखने लगे। पटके पर चिड़िया थी, पेड़ था, झोंपड़ी थी, सितारे थे। अलट-पलट कर देखने के बाद जिलाध्यक्ष बोले- देख भाई, इस पटके पर अगर तू कमल के फूल बना दे, तो हम ढेर सारे खरीद लेंगे।
अब रेगिस्तान में रहने वाले कलाकारों को लोककला में कमल घुसाना पड़ेगा। चाहे उन्होंने आंखों से कमल का फूल न देखा हो। बड़ी बात ये कि विधायक आदूराम मेघवाल ने भी हां में हां मिलाई।
उनसे पूछा कि सरकार ने अमृता हाट का प्रचार ठीक से नहीं किया तो विधायक महोदय बोले- यह तो आपका काम है। आप मीडिया वाले हो।

बाड़मेर के अमृता हाट में पटका देखते हुए जिलाध्यक्ष अनंतराम विश्नोई (बात करते हुए) और विधायक आदूराम मेघवाल (काली जैकेट में)।
वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब मंगलवार को मुलाकात होगी…
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