बरसों के इंतजार के बाद नर्मदा नदी पर नया पुल बनकर तैयार हो गया है। आज से इस पर ट्रैफिक शुरू होने की तैयारी थी, लेकिन एप्रोच रोड तैयार नहीं होने की वजह से मामला अटक गया। जिस कंपनी के पास नेशनल हाईवे निर्माण का ठेका है, उसने ओंकारेश्वर रोड का पेटी कांट्रेक्ट लेकर अपनी पूरी मशीनरी वहां लगा दी। इसके चलते इंदौर-हैदराबाद वाया खंडवा-बुरहानपुर की कनेक्टिविटी से जुड़ा बड़ा इकोनॉमी कॉरिडोर प्रभावित हो गया है। यह कॉरिडोर दो साल पहले तैयार हो जाना था, लेकिन अब तक अधूरा है। 2018 में शुरू हुआ था इंदौर-ऐदलाबाद प्रोजेक्ट एनएचएआई के तहत इंदौर-ऐदलाबाद नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी। खंडवा से इंदौर की ओर धनगांव तक का हिस्सा तीन साल पहले बनकर तैयार हो गया और वहां ट्रैफिक भी शुरू हो चुका है। लेकिन धनगांव के आगे इंदौर की ओर बलवाड़ा तक का हिस्सा अब भी अधर में लटका है। इस हिस्से का निर्माण नागपुर की केदारेश्वर कंपनी कर रही है। आरोप है कि कंपनी की लापरवाही का खामियाजा निमाड़-मालवा और महाराष्ट्र की जनता भुगत रही है। कंपनी ने मप्र सरकार के ओंकारेश्वर फोरलेन प्रोजेक्ट का पेटी कांट्रेक्ट ले लिया और नेशनल हाईवे का काम धीमा कर दिया। पहले इंदौर यूनिट, अब खंडवा यूनिट के जिम्मे इंदौर संभाग में एनएचएआई की दो इकाइयां काम कर रही हैं—खंडवा और इंदौर यूनिट। शुरुआत में धनगांव से एदलाबाद तक का हिस्सा खंडवा यूनिट के अधीन था, जबकि धनगांव से इंदौर तक का काम इंदौर यूनिट को सौंपा गया था। धनगांव से इंदौर के बीच तीन टनल, एक वायडक्ट और नर्मदा नदी पर पुल का निर्माण होना था। इंदौर यूनिट की मॉनिटरिंग कमजोर रहने से प्रोजेक्ट में देरी होती गई और ठेकेदारों ने अपनी सुविधा के अनुसार काम चलाया। पिछले चार महीने पहले धनगांव से बलवाड़ा तक का प्रोजेक्ट खंडवा यूनिट को सौंप दिया गया। इसके बाद काम में कुछ तेजी आई है, लेकिन प्रोजेक्ट पहले ही दो साल पीछे चल रहा है। 40 किलोमीटर, 600 करोड़ और अधूरी डेडलाइन धनगांव से बलवाड़ा तक करीब 40 किलोमीटर लंबे हिस्से का निर्माण 2022 में शुरू किया गया था। इसकी लागत लगभग 600 करोड़ रुपये बताई गई थी और डेडलाइन मार्च 2024 तय की गई थी। शुरुआत में कंपनी ने काम किया, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद निर्माण कार्य लगभग ठप हो गया। इसके बाद कंपनी ने ओंकारेश्वर रोड का ठेका पेटी कांट्रेक्ट पर ले लिया और अपनी अधिकांश मशीनरी वहां लगा दी। डेढ़ साल में 20% भी प्रगति नहीं बताया जा रहा है कि पिछले डेढ़ साल में नेशनल हाईवे निर्माण में 20 प्रतिशत तक की भी प्रगति नहीं हो पाई। नए साल में उच्च स्तर से फटकार लगने के बाद काम में कुछ तेजी आई है। नर्मदा पुल तैयार होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही ट्रैफिक शुरू हो जाएगा। लेकिन एप्रोच रोड नहीं बनने से सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया है। जब तक सड़क का यह हिस्सा पूरा नहीं होगा, तब तक पुल पर आवाजाही संभव नहीं हो पाएगी। इकोनॉमी कॉरिडोर पर असर इंदौर-हैदराबाद वाया खंडवा-बुरहानपुर मार्ग को एक बड़े इकोनॉमी कॉरिडोर के रूप में देखा जा रहा है। इस मार्ग से मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच व्यापार और परिवहन को बढ़ावा मिलना था। लेकिन प्रोजेक्ट की देरी से इस कनेक्टिविटी पर सीधा असर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय पर मॉनिटरिंग और सख्ती होती तो यह परियोजना दो साल पहले पूरी हो जाती। फिलहाल लोगों को इंतजार है कि एप्रोच रोड का काम जल्द पूरा हो और नर्मदा पुल पर ट्रैफिक शुरू हो सके।
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