नारनौंद में किसानों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।
हांसी जिले के नारनौंद क्षेत्र में 220 केवी और 132 केवी उच्च क्षमता बिजली लाइनों के निर्माण को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। किसानों का कहना है कि ये लाइनें उनकी उपजाऊ जमीन से होकर गुजर रही हैं, जिससे फसलों को नुकसान और आजीविका पर खतरा मंडरा रह
भारतीय किसान कामगार अधिकार मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतेंद्र लोहचब के आह्वान पर, राकेश लोहान की अध्यक्षता में लोहारी राघो, पेटवाड़ और नारनौंद के ग्रामीणों ने उपमंडल अधिकारी (एसडीएम) विकास यादव को ज्ञापन सौंपा।
किसानों बोले- बिना सहमति खेतों में लगाए जा रहे टावर
किसान नेताओं सतेंद्र लोहचब, राकेश लोहान, भूपेंद्र लोहान, जगबीर लोहान, विजेंद्र सिंह, दिनेश, विजय, सतीश, प्रदीप और रामकुमार ने बताया कि हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड (HVPNL) द्वारा दो प्रमुख बिजली लाइनों का निर्माण किया जा रहा है।
पहली लाइन जींद-किरोड़ी गामड़ा से नारनौंद होते हुए पेटवाड़ पावर हाउस तक जा रही है, जबकि दूसरी लाइन पेटवाड़ से जुलाना, खांडा-बीबीपुर होते हुए गैबीनगर से मसूदपुर तक बनाई जा रही है। किसानों का कहना है कि निगम के अधिकारी बिना उनकी सहमति और उचित मुआवजा दिए खेतों में टावर लगा रहे हैं और लाइनें खींच रहे हैं।
बिजली लाइनों के विरोध में अधिकारियों से मिलने पहुंचे किसान।
नीति 103-2024 के दिशा-निर्देशों की अनदेखी का आरोप
किसानों ने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार की 10 जुलाई 2024 को जारी नीति संख्या 103-2024 के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। इस नीति के तहत किसानों की सहमति और उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाना चाहिए, लेकिन निगम के अधिकारी इन नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उनकी उपजाऊ भूमि पर टावर लगाने से फसलों को नुकसान हो रहा है और उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है।
अधिकारियों और पुलिस पर धमकाने के आरोप
ज्ञापन में किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम के कुछ अधिकारी और पुलिस के सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) भीम सिंह किसानों को डराने-धमकाने का प्रयास कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाने और प्राथमिकी दर्ज कराने की धमकियां दी जा रही हैं, जिससे गांवों में भय का माहौल बन गया है।
किसानों की मांग—मार्केट रेट पर मिले मुआवजा
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी जमीन का मुआवजा मार्केट रेट के अनुसार दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। किसानों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनकी जमीन और अधिकारों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.