Mushroom Farming Benefits: पहाड़ी इलाकों में बंदर और सूअर जैसी जंगली हरकतों से फसल को नुकसान पहुंचाने के बीच, मशरूम की खेती किसानों के लिए सुरक्षित और लाभदायक विकल्प बनकर उभर रही है. कम जगह, कम लागत और अधिक मुनाफे के साथ यह खेती छोटे और बड़े सभी किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है. बाजार में इसकी लगातार बढ़ती मांग इसे भविष्य की उभरती हुई खेती बनाती है.
मशरूम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे खेतों में खुले में नहीं बल्कि एयर टाइट कमरे में उगाया जाता है, यानी ऐसी जगह जहां सूरज की सीधी रोशनी न पहुंचे और नमी बनी रहे. इस कारण बंदर, सूअर या अन्य जंगली जानवर इसका नुकसान नहीं कर पाते. साथ ही, कम जगह में भी मशरूम की अच्छी पैदावार ली जा सकती है, जिससे किसान को दोगुना मुनाफा मिलता है. यह खेती छोटे किसानों के लिए भी उपयुक्त है क्योंकि इसके लिए बड़े खेत की जरूरत नहीं होती.
मार्केट में भी अच्छी डिमांड
मशरूम पोषण से भरपूर होते हैं और इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन बी, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. इसे खाने से इम्यूनिटी मजबूत होती है और यह हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है. बाजार में मशरूम की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे इसकी बिक्री आसानी से हो जाती है और किसानों को अच्छा दाम मिलता है.
ऐसे होती है मशरूम की खेती
मशरूम की खेती के लिए सबसे पहले एक साफ और बंद कमरा तैयार करना होता है, जहां हवा का सीधा प्रवेश कम हो. कमरे में नमी 70 से 80 प्रतिशत तक बनाए रखना जरूरी होता है. खेती के लिए गेहूं का भूसा या धान का पुआल इस्तेमाल किया जाता है. भूसे को पानी में भिगोकर उबाल लिया जाता है ताकि उसमें मौजूद कीटाणु नष्ट हो जाएं. इसके बाद इसे ठंडा करके उसमें मशरूम के बीज यानी स्पॉन मिलाए जाते हैं. तैयार मिश्रण को पॉलीथिन बैग या ट्रे में भरकर कमरे में टांग दिया जाता है या शेल्फ पर रखा जाता है. कुछ ही दिनों में मशरूम उगने लगते हैं और लगभग 20 से 25 दिनों में फसल तैयार हो जाती है. एक बार में कई बार कटाई की जा सकती है, जिससे उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ जाते हैं.
पहाड़ी इलाके के लिए फायदेमंद खेती
इस तरह पहाड़ी इलाकों में जहां पारंपरिक खेती जंगली जानवरों के कारण मुश्किल होती जा रही है, वहां मशरूम की खेती किसानों के लिए सुरक्षित और लाभदायक विकल्प बनकर उभर रही है. कम लागत, कम जगह की जरूरत और अधिक मुनाफा इसे भविष्य की खेती बनाता है, जिससे पहाड़ी किसान न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बन सकते हैं बल्कि सुरक्षित तरीके से खेती भी कर सकते हैं.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें
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