दरअसल, पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में अचानक दिखी सफेदी ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों को हैरान कर दिया. कई इलाकों में धान के खेत, सड़कें और खुले स्थान मानो बर्फ से ढके नजर आए. हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों और मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह बर्फबारी नहीं, बल्कि ग्राउंड फ्रॉस्ट (पाला) है. अलीपुर मौसम कार्यालय के मुताबिक, पुरुलिया का न्यूनतम तापमान 8 से 9 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है. सुबह के समय कुछ क्षेत्रों में हल्के से मध्यम स्तर का कोहरा भी दर्ज किया गया.
मौसम विभाग का क्या है अलर्ट?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जब जमीन का तापमान बहुत नीचे चला जाता है और वातावरण में मौजूद जलवाष्प सीधे सतह पर जम जाती है, तो घास, फसलों और अन्य सतहों पर बर्फ जैसी परत बन जाती है. इसे ही पाला या फ्रॉस्ट कहा जाता है. यह प्रक्रिया आमतौर पर 0 से 5 डिग्री सेल्सियस के बीच भी हो सकती है, जरूरी नहीं कि तापमान शून्य से नीचे ही जाए. पुरुलिया में यह स्थिति पहले भी 2019 में देखी जा चुकी है. इस बार यह घटना बुधवार को फिर सामने आई, जब जिले का न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो लगभग दार्जिलिंग के बराबर रहा. उसी दिन दार्जिलिंग में तापमान 3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. रविवार को पुरुलिया में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस रहा. विशेषज्ञों का कहना है कि यह ठंडे और शुष्क मौसम का परिणाम है, जिसे उत्तर भारत से आ रही ठंडी हवाओं ने और तेज कर दिया है.
झारखंड में क्या है हाल?
उधर, झारखंड में ठंड ने और भी सख्त रूप दिखाया है. रांची से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित मैकलुस्कीगंज में बुधवार सुबह तापमान माइनस 0.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. स्थानीय लोगों ने थर्मामीटर के जरिए तापमान रिकॉर्ड किया. सुबह के समय गाड़ियों की छतें, घास, खेत और घरों की छप्परें सफेद चादर से ढकी नजर आईं. जमीन पर जमी ओस पूरी तरह बर्फ में बदल चुकी थी. मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर भारत में हो रही लगातार बर्फबारी और ठंडी हवाओं का सीधा असर झारखंड के ऊंचाई वाले और पठारी इलाकों पर पड़ रहा है. पूर्वानुमान के मुताबिक जनवरी के दूसरे हफ्ते में मैकलुस्कीगंज और आसपास के इलाकों में तापमान और गिर सकता है, जिससे शीतलहर का प्रकोप बढ़ने की आशंका है.
खास पहचान
मैकलुस्कीगंज अपने आप में एक खास पहचान रखता है. कभी यह इलाका एंग्लो-इंडियन समुदाय का प्रमुख केंद्र रहा है और इसे ‘मिनी लंदन’ के नाम से भी जाना जाता है. जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे इस कस्बे की जलवायु अपेक्षाकृत शुष्क है, जहां सर्दियों में अक्सर पाला पड़ता है. वर्ष 2013 में यहां जनवरी के महीने में तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया था. आज भी मैकलुस्कीगंज में ब्रिटिश काल की विरासत साफ झलकती है. यहां बने हेरिटेज बंगले, डांस क्लब, वॉच टावर और विक्टोरियन शैली की इमारतें पर्यटकों को आकर्षित करती हैं. हालांकि समय के साथ यहां रहने वाले एंग्लो-इंडियन परिवारों की संख्या काफी घट गई है, लेकिन इस कस्बे की ऐतिहासिक पहचान और ठंडी आबोहवा आज भी लोगों को अपनी ओर खींचती है.
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