Mulching Multiple Benefits: मल्चिंग को आज के समय की खेती की जरूरत कहा जाए तो गलत नहीं होगा. रेज बेड विधि से टमाटर, शिमला मिर्च, स्ट्रॉबेरी जैसी फसलें ठंड में सुरक्षित रहती हैं, उत्पादन बढ़ता है और लागत घटती है.
ठंड में फसलों की सुरक्षा के लिए मल्चिंग
क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र चियांकी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार बताते हैं कि सर्दियों में कम तापमान के कारण पौधों की बढ़वार रुक जाती है और उत्पादन प्रभावित होता है. ऐसे में हाई वैल्यू फसल की खेती में मल्चिंग बेहद लाभदायक तकनीक साबित होती है. मल्च का उपयोग करने से फसल को ठंड से बचाया जा सकता है और मिट्टी का तापमान संतुलित रहता है.
रेज बेड विधि और मल्च का महत्व
वे आगे बताते हैं कि रेज बेड विधि से की जाने वाली खेती में मल्च का उपयोग और भी ज्यादा फायदेमंद होता है. इससे मिट्टी की बनावट बेहतर बनी रहती है और पौधों को जड़ों के माध्यम से अधिक पोषक तत्व मिलते हैं. इस विधि से खेती करने पर जल प्रबंधन भी बेहतर होता है. टमाटर, शिमला मिर्च, स्ट्रॉबेरी जैसी हाई वैल्यू फसलों की खेती में मल्च बेहद कारगर है. मल्चिंग से मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे सिंचाई की जरूरत कम हो जाती है और पानी की बचत होती है.
खरपतवार नियंत्रण और पोषक तत्व संरक्षण
मल्च के उपयोग से खेत में घास और पुआल जैसी खरपतवार नहीं उगती. इससे पौधों को पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा नहीं करनी पड़ती और मिट्टी के पोषक तत्व सीधे फसलों को मिलते हैं. इससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है. मल्चिंग मिट्टी के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करती है. ठंड के मौसम में मल्च लगाने से मिट्टी का तापमान बढ़ता है, जिससे पौधों की जड़ें सुरक्षित रहती हैं. साथ ही यह मिट्टी के कटाव को भी रोकती है और मिट्टी को भुरभुरा बनाए रखती है.
ऑर्गेनिक और प्लास्टिक मल्च का उपयोग
अगर प्लास्टिक मल्च की जगह ऑर्गेनिक मल्च का उपयोग किया जाए, तो यह धीरे-धीरे मिट्टी में घुलकर जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ाता है. वहीं प्लास्टिक मल्च के लिए सामान्य तौर पर 25 माइक्रोन मोटाई का उपयोग किया जाता है. तीन महीने की फसल के लिए 20 माइक्रोन और लंबी अवधि की फसलों के लिए 25 माइक्रोन मल्च उपयुक्त माना जाता है.
बढ़े उत्पादन, घटे लागत
मल्चिंग एक ऐसी तकनीक है, जो कम लागत में अधिक उत्पादन देने में सहायक है. इससे फसल सुरक्षित रहती है, पानी की बचत होती है और मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है. आधुनिक खेती को अपनाने के लिए मल्चिंग आज के समय में किसानों के लिए बेहद जरूरी हो गई है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें
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