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Rajasthan Me Kheti Ke Liye Yojnaaen : राजस्थान में किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ावा देने के उद्देश्य से गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना संचालित की जा रही है. इसके तहत खेत पर वर्मी कंपोस्ट इकाई स्थापित करने के लिए 10 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है. निर्धारित आकार के बेड बनाकर किसान गोबर और केंचुओं की मदद से जैविक खाद तैयार कर सकते हैं. योजना का मकसद रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाना और मिट्टी की सेहत सुधारना है. इच्छुक किसान आवश्यक दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन या ई-मित्र केंद्र के जरिए आवेदन कर सकते हैं.
वर्मी कंपोस्ट इकाई के लिए निर्धारित मानक
योजना के तहत किसानों को वर्मी कंपोस्ट के लिए दो बेड बनाने पर अनुदान दिया जाता है. प्रत्येक बेड का आकार 10 फुट लंबा, 3 फुट चौड़ा और 1.5 से 2 फुट ऊंचा निर्धारित किया गया है. यदि कोई किसान एक ही बेड बनाना चाहता है तो उसका आकार 20 फुट लंबा, 3 फुट चौड़ा और 1.5 से 2 फुट ऊंचा रखा जाएगा. वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के लिए गोबर में लगभग 8 से 10 किलो केंचुए डाले जाते हैं. बेड को धूप से बचाने और नमी बनाए रखने के लिए ऊपर छाया की उचित व्यवस्था करना जरूरी है. इससे अच्छी गुणवत्ता की जैविक खाद तैयार होती है.
योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी दस्तावेज
गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड, जन आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण, मूल निवास प्रमाण पत्र और जमाबंदी की आवश्यकता होती है. योजना का लाभ लेने के लिए किसान के पास कम से कम 2 से 3 गायें होना आवश्यक है, ताकि पर्याप्त मात्रा में गोबर उपलब्ध हो सके. इच्छुक किसान अपने नजदीकी ई-मित्र केंद्र पर जाकर या राज किसान साथी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आवेदन वर्षभर किए जा सकते हैं.
जैविक खाद से मिट्टी की सेहत में सुधार
जैविक खाद के उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति, जलधारण क्षमता और भौतिक गुणों में सुधार होता है. इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में बढ़ोतरी होती है. साथ ही किसान स्वयं खाद बनाकर महंगे रासायनिक उर्वरकों पर होने वाला खर्च भी कम कर सकते हैं.
रासायनिक उर्वरकों से हो रहा नुकसान
कृषि अधिकारी कैलाश चंद्र शर्मा ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के अधिक उपयोग से मिट्टी के पोषक तत्व धीरे-धीरे खत्म हो जाते हैं. इससे उत्पादन प्रभावित होता है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और लाभकारी कदम साबित हो सकती है.
About the Author
नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
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