बिहार के जमुई में सिमुलतला के बड़ुआ पुल पर शनिवार रात एक रेल दुर्घटना हुई। इस घटना को भारतीय रेलवे की तैयारियों की एक महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, यदि समय रहते आवश्यक बदलाव नहीं किए गए होते, तो यह दुर्घटना गंभीर रूप ले सकती थी।
रेलवे सूत्रों और तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले एक साल में इस रेल सेक्शन को ‘उच्च जोखिम’ से ‘उच्च सुरक्षा’ वाले क्षेत्र में बदला गया था। बड़ुआ पुल इस बदलाव का एक प्रमुख उदाहरण है।
रेल दुर्घटना के बाद बिखरे डिब्बे।
1923 यानी ब्रिटिश काल में बना था पुल
यह पुल ब्रिटिश काल में 1923 में निर्मित हुआ था। इसका पुराना गर्डर दशकों तक उपयोग में रहा, लेकिन बढ़ते यातायात, भारी मालगाड़ियों और तेज गति के कारण यह कमजोर हो रहा था। फरवरी 2024 में, पुराने गर्डर को हटाकर आधुनिक तकनीक से निर्मित एक नया गर्डर स्थापित किया गया था।
शनिवार रात दुर्घटना के दौरान, इस नए ढांचे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पुराना गर्डर होता, तो पुल की संरचना अस्थिर हो सकती थी, जिससे नदी और ट्रैक दोनों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता था। नए गर्डर ने दबाव को वितरित करके झटके की तीव्रता को कम किया।

बड़ुआ पुल हादसा।
इस घटना का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू पटरियों से संबंधित है। पिछले वर्ष इस मार्ग पर 52 किलोग्राम की पुरानी पटरियों को हटाकर 60 किलोग्राम की भारी-भरकम पटरियां लगाई गई थीं।
ये भारी पटरियां न केवल अधिक वजन सहन करती हैं, बल्कि झटकों को अवशोषित करने और ट्रैक को स्थिर रखने में भी सहायक होती हैं। इन्हीं सुधारों के कारण इस सेक्शन की गति सीमा 110 किमी/घंटा से बढ़ाकर 130 किमी/घंटा की गई थी। दुर्घटना के समय इन मजबूत पटरियों ने ट्रैक को सुरक्षित रखने में मदद की।
हालांकि, घटना के कारणों की जांच जारी है और रेलवे की जवाबदेही तय होगी, लेकिन बड़ुआ पुल हादसा एक स्पष्ट संदेश दे गया है,पुराने ढांचे के भरोसे नई चुनौतियों का सामना नहीं किया जा सकता। समय रहते लिए गए फैसले ही आपदा और राहत के बीच की पतली रेखा होते हैं।

मौके पर जांच करते अधिकारी।
1923 के गर्डर की जगह 2024 का आधुनिक गर्डर।हेवी ड्यूटी ट्रैक: 52 किग्रा से 60 किग्रा की पटरियों में बदलाव। मजबूत ढांचे के कारण अधिक स्पीड पर भी स्थिरता।बड़ुआ पुल की घटना ने यह साफ कर दिया कि हादसे कभी भी हो सकते हैं, लेकिन नुकसान कितना होगा,यह तैयारी तय करती है।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.