Mandi Maha Shivratri Mahotsav: मंडी शहर 500वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, महाशिवरात्रि महोत्सव में राज माधव राय की अगुवाई, डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री शुभारंभ करेंगे, 16 से 22 फरवरी तक आयोजन होगा. 1527 ई. में मंडी शहर की स्थापना के बाद से ही यहां शिवरात्रि महोत्सव को मनाने की परंपरा रही है.
मंडी की इंदिरा मार्केट.
दरअसल, भगवान शिव को समर्पित महाशिवरात्रि का पर्व छोटी काशी मंडी में कुछ अलग अंदाज में मनाया जाता है. इतिहास के अनुसार 1527 ई. में मंडी शहर की स्थापना के बाद से ही यहां शिवरात्रि महोत्सव को मनाने की परंपरा रही है. तत्कालीन राजा अजबर सेन द्वारा मंडी शहर की स्थापना की गई थी. यह शहर अपने प्राचीन मंदिरों व देव संस्कृति के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है. मंडी नगर की स्थापना के बाद से राजा ने वर्ष में एक बार शिवरात्रि के उपलक्ष पर रियासत के सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित करके उत्सव मनाने की शुरूआत की थी, तभी से छोटी काशी में शिवरात्रि का यह पर्व मनाया जा रहा है.
आज यह शहर अपनी स्थापना के 499 वर्ष पूरा करके 500वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है. इस बार के शिवरात्रि महोत्सव में मंडी शहर के स्वर्णिम 500 वर्षों के इतिहास की झलक दिखाने का प्रयास किया जा रहा है. डीसी मंडी अपूर्व देवगन ने बताया कि समय-समय पर इस महोत्सव में कई बदलाव हुए हैं. प्रशासन की तरफ से इसका आयोजन होता है जिसमें देवी-देवताओं की प्राचीन पंरपराओं के निर्वहन से लेकर अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों और व्यापारिक मेले के संचालन का प्रबंध किया जाता है.
मंडी का भूतनाथ मंदिर.
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके मंडी के शिवरात्रि मेले का राज परिवार से गहरा नाता है. जब तक शहर में भगवान माधव राय की पालकी नहीं निकलती है, तब तक शिवरात्रि महोत्सव की शोभायात्रा शुरू नहीं होती. राज माधव राय भगवान श्री कृष्ण का रूप हैं. राज माधव राय मंदिर के पुजारी हर्ष कुमार ने बताया कि 18वीं शताब्दी के दौरान राजा सूरज सेन के 18 पुत्रों का निधन होने हो गया और उन्होंने अपना सारा राजपाठ राज माधव राय को सौंपकर खुद सेवक बन गए. तब से आज तक राज माधव राय की अगुवाई में ही छोटी काशी मंडी में शिवरात्रि महोत्सव मनाया जा रहा है. यही कारण है कि महोत्सव में शिरकत करने वाले सभी देवी देवता सबसे पहले राज माधव राय मंदिर के पास ही अपनी हाजरी भरते हैं.
देवी देवता सबसे पहले राज माधव राय मंदिर के पास ही अपनी हाजरी भरते हैं.
देवी-देवताओं की भव्य जलेब होती है आकर्षण का मुख्य केंद्र
शिवरात्रि महोत्सव की एक मान्यता यह भी है कि इसमें शैव, वैष्णव और लोक देवताओं का मिलन होता है. शैव को भगवान शिव, वैष्णव को भगवान कृष्ण और लोक देवता में जनपद के आराध्य देव कमरूनाग को कहा गया है. सर्व देवता समिति के प्रधान शिवपाल शर्मा ने बताया कि शिवरात्रि के एक दिन पहले से देवी-देवताओं का आगमन छोटी में शुरू हो जाता है. शिवरात्रि के अगले दिन से सात दिवसीय शिवरात्रि महोत्सव शुरू होता है और इसकी शुरूआत पारंपरिक जलेब यानी शोभायात्रा से होती है. इस जलेब में लोग अपने स्थानीय देवी-देवताओं के साथ झूमते-नाचते हुए चलते हैं. झूमते देवरथों का यह विहंगम दृश्य हर किसी को भाव विभोर कर देता है और इसे देखने के लिए लोग बड़ी संख्या में यहां आते हैं.
परंपराओं के अनुसार इस महोत्सव का शुभारंभ प्रदेश के मुख्यमंत्री की ओर से किया जाता है.
डिप्टी सीएम करेंगे शिवरात्रि महोत्सव का शुभारंभ
आजादी के बाद बनी परंपराओं के अनुसार इस महोत्सव का शुभारंभ प्रदेश के मुख्यमंत्री की ओर से किया जाता है लेकिन इस बार डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री शुभारंभ करेंगे. शिवरात्रि का अधिकारिक महोत्सव हमेशा ही शिवरात्रि के अगले दिन से शुरू होता है. इसलिए इस बार यह महोत्सव 16 से 22 फरवरी तक मनाया जा रहा है. 16 फरवरी को महोत्सव की पहली पारंपरिक जलेब निकलेगी जबकि महोत्सव की दूसरी मध्य जलेब 19 फरवरी और अंतिम जलेब 22 फरवरी को निकाली जाएगी. अंतिम जलेब में महामहिम राज्यपाल शिकरत करके इस महोत्सव का विधिवत समापन करेंगे. महोत्सव के दौरान 6 सांस्कृतिक संध्याएं भी आयोजित होंगी, जिसमें इस बार सिर्फ हिमाचली कलाकार ही प्रस्तुतियां देंगे.
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Vinod Kumar Katwal, a Season journalist with 14 years of experience across print and digital media. I have worked with some of India’s most respected news organizations, including Dainik Bhaskar, IANS, Punjab K…और पढ़ें
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