कांग्रेस की श्री मुक्तसर साहिब में माघी मेले पर सियासी कानफ्रेंस नहीं।
पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के गृह जिले श्री मुक्तसर साहिब में इस बार माघी मेले के मौके पर होने वाली मालवा की सबसे बड़ी सियासी कॉन्फ्रेंस नहीं होगी। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस की इस बड़े आयोजन से गैरमौजूदगी
माघी मेले पर हर साल होने वाली यह राजनीतिक रैली मालवा ही नहीं, पूरे पंजाब की राजनीति के लिहाज से बेहद अहम मानी जाती रही है। ऐसे समय में, जब अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, कांग्रेस का इस सियासी मंच से दूर रहना मालवा में पार्टी की पकड़ ढीली होने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
मनरेगा आंदोलन और गुटबाजी बनी वजह
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, G-RAM-G के खिलाफ चल रही रैलियों, ‘मनरेगा बचाओ संघर्ष’ और कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी के चलते इस बार माघी पर सियासी कॉन्फ्रेंस नहीं करने का फैसला लिया गया है। बताया जा रहा है कि पार्टी के एक बड़े धड़े में इस फैसले को लेकर अंदरखाते नाराजगी है। कई नेता इसे मालवा जैसे निर्णायक इलाके में राजनीतिक अवसर गंवाने के तौर पर देख रहे हैं।
माघी पर सियासी कॉन्फ्रेंस क्यों है अहम
- 40 मुक्तों की याद में लगने वाले माघी मेले में लाखों श्रद्धालु गुरुद्वारा श्री मुक्तसर साहिब में मत्था टेकने पहुंचते हैं
- इसी मंच से पंजाब की राजनीति की दिशा तय करने वाले सियासी संदेश दिए जाते रहे हैं
- श्री मुक्तसर साहिब और आसपास के करीब 20 विधानसभा क्षेत्रों पर इसका सीधा असर पड़ता है
- 2027 विधानसभा चुनाव से पहले इस रैली के राजनीतिक मायने और भी बढ़ जाते हैं
- मालवा में नेताओं और कार्यकर्ताओं को बड़ा राजनीतिक मनोबल मिलता है
पंजाब की राजनीति में मालवा की निर्णायक भूमिका
पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से 69 सीटें अकेले मालवा क्षेत्र से आती हैं। ऐसे में सरकार बनाने का रास्ता काफी हद तक यहीं से तय होता है। माझा और दोआबा, दोनों मिलकर भी मालवा के बराबर सीटें नहीं रखते। यही वजह है कि कांग्रेस ने G-RAM-G के खिलाफ सबसे ज्यादा रोष रैलियां भी मालवा में ही की थीं। मालवा का बड़ा हिस्सा ग्रामीण है और माघी मेला सीधे ग्रामीण वोटर से जुड़ा हुआ आयोजन माना जाता है, इसके बावजूद कांग्रेस द्वारा इसे नजरअंदाज करना सियासी संदेश दे रहा है।
शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) भी नहीं करेगा कॉन्फ्रेंस
इस बार माघी मेले पर सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, बल्कि शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) ने भी सियासी कॉन्फ्रेंस से दूरी बना ली है। इससे पहले यह दल भी माघी मेले के मौके पर अपनी सियासी ताकत दिखाता रहा है। दो बड़े दलों की गैरमौजूदगी ने माघी मेले की सियासी चमक को फीका कर दिया है, जबकि आम आदमी पार्टी और भाजपा इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
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