जिले में जीएसटी एंटी इवेजन ब्यूरो की दो दिवसीय कार्रवाई के बाद हर्ष कंस्ट्रक्शन और वैनगंगा कंस्ट्रक्शन फर्मों ने टैक्स संबंधी अनियमितताओं को स्वीकार करते हुए डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की राशि विभाग के समक्ष सरेंडर की है। यह कार्रवाई जिले में अब तक की सबसे बड़ी जीएसटी जांचों में से एक मानी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार हर्ष कंस्ट्रक्शन ने लगभग 70 लाख और वैनगंगा कंस्ट्रक्शन ने करीब 80 लाख रुपये से अधिक की राशि सरेंडर की है। यह राशि नकद भुगतान और इनपुट टैक्स क्रेडिट के माध्यम से जमा कराई गई है।
जबलपुर जीएसटी कार्यालय से आई टीम ने दोनों फर्मों के पिछले चार वर्षों के बिल, रजिस्टर, ई-वे बिल, जीएसटी रिटर्न और आईटीसी क्लेम से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच की। प्रारंभिक जांच में कई स्थानों पर टैक्स में अंतर और संदिग्ध लेन-देन सामने आए, जिसके बाद फर्मों को सरेंडर करना पड़ा।
टीम हर्ष कंस्ट्रक्शन से कई अहम दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त कर जबलपुर ले गई है। इनकी अब फॉरेंसिक और तकनीकी जांच की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि अनियमितताएं जान-बूझकर की गईं या किसी तकनीकी त्रुटि के कारण हुईं। अधिकारियों के अनुसार, यदि जान-बूझकर टैक्स चोरी साबित होती है तो फर्मों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
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गुरुवार देर रात जबलपुर एंटी इवेजन ब्यूरो की दो टीमों ने एक साथ बालाघाट में दबिश दी। एक टीम हर्ष कंस्ट्रक्शन के कार्यालय पहुंची, जबकि दूसरी टीम वैनगंगा कंस्ट्रक्शन से जुड़े ठेकेदार घरडे के निवास पर पहुंची। दोनों स्थानों पर करीब दो दिन तक दस्तावेजों की जांच की गई।
हर्ष कंस्ट्रक्शन का नाम पूर्व मंत्री रामकिशोर कावरे के भाई कुमार कावरे से जुड़ा बताया जा रहा है। रामकिशोर कावरे वर्तमान में भाजपा जिलाध्यक्ष हैं, जिसके चलते इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
आम नागरिकों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी की जाती है, तो इससे टैक्स व्यवस्था में भरोसा बढ़ेगा। लोगों को उम्मीद है कि विभाग किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर कार्रवाई करेगा।
इधर जीएसटी अधिकारियों का कहना है कि यह प्रारंभिक सरेंडर है। जांच अभी जारी है और दस्तावेजों के आधार पर अंतिम टैक्स देनदारी तय की जाएगी। यदि आगे और अनियमितताएं सामने आती हैं, तो सरेंडर राशि बढ़ सकती है।
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