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Bottle Guard Farming Tips: गर्मी के मौसम में लौकी की फसल में सड़न और कीटों का हमला किसानों के लिए बड़ी समस्या बन रहा है. कई किसान शिकायत कर रहे हैं कि अच्छी सिंचाई और देखभाल के बावजूद खेत में ही लौकी खराब हो रही है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार फंगस, फल मक्खी और पत्ता छेदक कीट इस नुकसान के मुख्य कारण हैं. समय पर फफूंदनाशक और कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल करके इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है. अगर किसान सही पोषण और नियमित निगरानी रखें तो लौकी की खेती फिर से मुनाफे का सौदा बन सकती है.
लौकी को आमतौर पर गर्मी के मौसम की अच्छी और मुनाफे वाली फसल माना जाता है. लेकिन अगर समय पर बीमारी की पहचान और उसका इलाज न किया जाए तो यही फसल घाटे का सौदा भी बन सकती है.
जमीन के संपर्क में आते ही शुरू हो जाती है सड़न
कृषि एक्सपर्ट खुलय जोशी बताते हैं कि अक्सर किसान फूल आने के बाद फसल की देखभाल थोड़ी कम कर देते हैं. यही सबसे बड़ी गलती साबित होती है. जब लौकी का फल सीधे जमीन के संपर्क में आ जाता है तो मिट्टी की नमी और फंगस उस पर हमला कर देते हैं. शुरुआत में फल पर काले धब्बे या दाग दिखाई देते हैं. धीरे-धीरे फल नरम होने लगता है और बाद में पूरी तरह सड़ जाता है. इस समस्या से बचने के लिए किसानों को समय पर फफूंदनाशक दवाओं का इस्तेमाल करना चाहिए. विशेषज्ञों के मुताबिक बेविस्टिन और मैनकोजेब जैसी दवाएं फंगस को रोकने में काफी असरदार मानी जाती हैं.
फल मक्खी भी बन रही बड़ी परेशानी
फंगस के अलावा लौकी की फसल में एक और बड़ी समस्या फल मक्खी की होती है. यह मक्खी कद्दू वर्ग की लगभग सभी फसलों में पाई जाती है. फल मक्खी लौकी में छोटा सा छेद कर देती है और उसके अंदर अंडे दे देती है. कुछ ही समय में उससे निकलने वाले कीड़े फल को अंदर से खराब कर देते हैं. बाहर से फल ठीक दिखता है लेकिन अंदर से पूरी तरह खराब हो जाता है. अगर समय रहते नियंत्रण न किया जाए तो पूरी फसल पर इसका असर पड़ सकता है.
पत्ता छेदक कीट से भी बचाना जरूरी
लौकी की फसल में लीफ हॉपर यानी पत्ता छेदक कीट भी काफी नुकसान पहुंचाते हैं. ये पत्तियों का रस चूसते हैं, जिससे पत्तों पर बड़े-बड़े पीले या भूरे धब्बे बन जाते हैं. धीरे-धीरे पत्तियां सूखने लगती हैं और पौधे की बढ़वार रुक जाती है. इन कीटों से बचाव के लिए किसानों को समय-समय पर उचित कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करना चाहिए.
कैल्शियम की कमी भी घटा सकती है उत्पादन
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार पोषक तत्वों की कमी भी उत्पादन को प्रभावित करती है. लौकी में खासतौर पर कैल्शियम की कमी होने पर फल का विकास ठीक से नहीं हो पाता.
एक लौकी खराब होने से करीब आधा किलो तक का नुकसान हो सकता है, जो सीधे किसान की मेहनत और कमाई पर असर डालता है. इसलिए सही पोषण, समय पर दवा और नियमित निगरानी बेहद जरूरी है.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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