Latehar Virasat: लातेहार के जंगलों में स्थित पलामू किला 400 साल पुराना है और उस समय प्रचलित रैंडम रबल मेसनरी तकनीक से बना है. इसकी मजबूती का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि इतने सालों बाद भी यह जस का तस खड़ा है. हालांकि झारखंड की इस सांस्कृतिक विरासत को अब संजोने की जरूरत है.
रैंडम रबल मेसनरी तकनीक से निर्माण
विरासत संरक्षक विशेषज्ञ श्री देव सिंह बताते हैं कि पलामू किले का निर्माण उस समय प्रचलित रैंडम रबल मेसनरी तकनीक से किया गया था. इस तकनीक में पत्थर और ईंट दोनों का उपयोग किया जाता था. अलग-अलग आकार के पत्थरों और ईंटों को खास तरीके से जोड़कर मजबूत दीवारें तैयार की जाती थीं. यही कारण है कि किले की बनावट आज भी काफी मजबूत दिखाई देती है.
सुरखी और चूना से होती थी जोड़ाई
उस दौर में आधुनिक सीमेंट या मशीनें उपलब्ध नहीं थीं. इसलिए किले की दीवारों को जोड़ने के लिए सुरखी और चूना का इस्तेमाल किया जाता था. सुरखी यानी पिसी हुई ईंट और चूना मिलाकर एक मजबूत मिश्रण तैयार किया जाता था. इसी मिश्रण से पत्थरों और ईंटों को जोड़कर दीवारें बनाई जाती थीं.
प्राकृतिक सामग्री का होता था उपयोग
किले के निर्माण में केवल सुरखी और चूना ही नहीं बल्कि कई प्राकृतिक चीजों का भी इस्तेमाल किया जाता था. इसमें छऊआ, लठ्ठा, गुड़ और मेथी जैसी सामग्री मिलाई जाती थी. इन चीजों को मिलाने से मिश्रण की मजबूती और टिकाऊपन बढ़ जाता था. यह उस समय की पारंपरिक और वैज्ञानिक समझ को दिखाता है.
बिना आधुनिक उपकरणों के निर्माण
आज के समय में निर्माण कार्य के लिए आधुनिक मशीनें और उपकरण मौजूद हैं. लेकिन 400 साल पहले ऐसे साधन उपलब्ध नहीं थे. इसके बावजूद उस समय के कारीगरों ने अपने अनुभव और पारंपरिक तकनीक के सहारे इतना मजबूत किला तैयार किया. यह उस दौर की कुशल कारीगरी का प्रमाण है.
40 फीट ऊंची दीवारें आज भी मजबूत
पलामू किले की सबसे खास बात इसकी ऊंची और मजबूत दीवारें हैं. लगभग 40 फीट ऊंची दीवारें आज भी मजबूती से खड़ी हैं. इतनी लंबी अवधि के बाद भी इन दीवारों का टिके रहना उस समय की निर्माण तकनीक की गुणवत्ता को साबित करता है.
मजबूती का जीता-जागता उदाहरण
कई लोग यह जानना चाहते हैं कि इतने पुराने किले की मजबूती कितनी है. विशेषज्ञों का कहना है कि 400 साल बाद भी इसकी दीवारों का खड़ा रहना ही इसकी मजबूती का सबसे बड़ा प्रमाण है. यह किला इतिहास और इंजीनियरिंग दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
विरासत को सहेजने की जरूरत
पलामू किला केवल एक ऐतिहासिक इमारत नहीं बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसे सुरक्षित रखना जरूरी है ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस ऐतिहासिक धरोहर को देख सकें. साथ ही यह किला क्षेत्र के पर्यटन को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें
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