Kota News : कोटा के नयापुरा क्षेत्र में छोटी पुलिया पर तेज रफ्तार स्कॉर्पियो चंबल नदी में गिरी, SDRF ने 7-8 लोगों को बचाया. पुलिया की सुरक्षा पर फिर सवाल उठे हैं.
घटना के शुरुआती दो पैराग्राफ ही कोटा शहर के लिए इस पुलिया पर बार-बार होने वाली त्रासदी की तस्वीर दिखा देते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार हादसों के बाद भी इस पुलिया पर सुरक्षा उपाय नहीं बढ़ाए गए, जबकि यहां तेज रफ्तार और मोड़ के कारण वाहन फिसलने के मामले पहले भी सामने आए हैं. सुबह हुए हादसे में स्कॉर्पियो में सवार 7 से 8 लोग फंस गए थे, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई. गाड़ी नदी में डूबते-डूबते बची, लेकिन समय रहते बचाव टीम पहुंची और एक बड़ा हादसा टल गया. यह क्षेत्र पहले से ही संवेदनशील माना जाता है, और उसी इतिहास के कारण इस घटना ने प्रशासन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
अनियंत्रित स्कॉर्पियो चंबल में समाई, टीमों ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसा सुबह करीब उस समय हुआ जब स्कॉर्पियो नयापुरा छोटी पुलिया से गुजर रही थी. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वाहन तेज रफ्तार में था और अचानक मोड़ पर चालक का नियंत्रण बिगड़ गया. स्कॉर्पियो पुलिया की रेलिंग तोड़ते हुए सीधे चंबल नदी में गिर गई. हादसे की जानकारी मिलते ही नयापुरा पुलिस, नगर निगम की रेस्क्यू टीम और SDRF मौके पर पहुंची. पानी में डूब रही गाड़ी तक पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन टीमों ने तुरंत रस्सियां और बोट की मदद से बचाव कार्य शुरू किया. स्कॉर्पियो में 7 से 8 लोग सवार थे, जिन्हें बड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया. सभी लोगों की सांसें उस वक्त थम गईं जब कार पूरी तरह पानी में जाने ही वाली थी. समय रहते रेस्क्यू होने से बड़ा नुकसान टल गया.
पहले भी हुई है बड़ी दुर्घटना, पुलिया की सुरक्षा पर उठे सवाल
यह वही पुलिया है जहां कुछ वर्ष पहले दूल्हे समेत 9 लोगों की मौत हो गई थी. उस दर्दनाक घटना के बाद भी यहां सुरक्षा में कोई बड़ा सुधार नहीं किया गया. स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि पुलिया संकरी है, रेलिंग कमजोर है और रात में रोशनी भी पर्याप्त नहीं होती. बार-बार होने वाले हादसों के बावजूद प्रशासन ने यहां स्पीड कंट्रोल उपाय, चेतावनी बोर्ड, ऊंची रेलिंग या बैरियर जैसे जरूरी इंतजाम नहीं किए. यह हादसा एक बार फिर यह सवाल उठा गया कि आखिर कब तक पुलिया की लापरवाही लोगों की जान लेती रहेगी.
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नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
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