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Kota News: कोटा के डॉ. समीर मेहता ने टोंक के एक नवजात का सफल ऑपरेशन किया जिसकी आंतें जन्म से ही पेट के बाहर थीं. 2 लाख बच्चों में एक को होने वाली इस दुर्लभ बीमारी ‘गैस्ट्रोचियासिस’ का समय रहते इलाज कर बच्चे की जान बचा ली गई. अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और कोटा के चिकित्सा क्षेत्र में इसे एक बड़ी सफलता माना जा रहा है.
कोटा: कोटा के वरिष्ठ शिशु शल्य चिकित्सक डॉ. समीर मेहता ने एक बार फिर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है. वल्लभबाड़ी स्थित मेहता नर्सिंग होम में एक ऐसे नवजात का सफल ऑपरेशन किया गया है. जिसका जन्म एक अत्यंत दुर्लभ और जटिल बीमारी के साथ हुआ था. इस बीमारी को चिकित्सा विज्ञान की भाषा में ‘गैस्ट्रोचियासिस विद आइलियल एट्रेसिया’ कहा जाता है. डॉ. समीर मेहता के अनुसार. यह रोग इतना दुर्लभ है कि दुनिया भर में लगभग हर दो लाख नवजातों में से केवल एक बच्चे में इसके लक्षण पाए जाते हैं. इस बीमारी में शिशु के जन्म के समय ही उसकी नाभि के पास एक बड़ा सुराख होता है. जिससे उसकी आंतें पेट के बाहर निकली होती हैं और साथ ही आंतों के आंतरिक हिस्से में गंभीर रुकावट भी होती है.
यह पूरा मामला टोंक निवासी एक दंपति से जुड़ा है. उन्होंने अपने गांव में दाई की मदद से डिलीवरी करवाई थी. जन्म के तुरंत बाद परिजनों ने देखा कि नवजात की नाभि के पास एक बड़ा पैदाइशी डिफेक्ट है. जिससे उसकी आंतें शरीर से बाहर निकल आई थीं. स्थिति तब और अधिक गंभीर हो गई जब जन्म के बाद बच्चा न तो मल त्याग कर पाया और न ही स्तनपान कर पा रहा था. मासूम की ऐसी नाजुक हालत देख परिजन बुरी तरह घबरा गए और बिना समय गंवाए उसे तुरंत कोटा लेकर आए. कोटा पहुँचते ही डॉ. समीर मेहता ने बच्चे का गहन परीक्षण किया और स्थिति की अत्यधिक गंभीरता को देखते हुए तत्काल आपातकालीन ऑपरेशन की सलाह दी. उन्होंने परिजनों को साफ शब्दों में बताया कि यदि अगले कुछ घंटों में सर्जरी नहीं हुई. तो बच्चे की जान बचाना पूरी तरह असंभव होगा.
ऑपरेशन थियेटर में घंटों तक चली जीवन की जंग
परिजनों की तत्काल सहमति मिलते ही बच्चे को मेहता नर्सिंग होम के ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया. इस जटिल ऑपरेशन में निच्छेतना (Anesthesia) का अत्यंत महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण कार्य डॉ. जे. पी. गुप्ता ने संभाला. ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने अपनी जाँच में पाया कि बाहर निकली हुई आंतों में न केवल रुकावट थी. बल्कि आंत का कुछ हिस्सा संक्रमण के कारण बुरी तरह खराब होकर काला पड़ चुका था. डॉ. समीर मेहता ने अपनी विशेषज्ञता का परिचय देते हुए खराब हिस्से को शरीर से अलग किया और स्वस्थ आंतों को सफलतापूर्वक आपस में जोड़कर पेट के भीतर सुरक्षित रूप से स्थापित किया. यह एक बेहद जोखिम भरा कार्य था. क्योंकि नवजात का शरीर बहुत ही नाजुक था और पूरे शरीर में संक्रमण फैलने का खतरा लगातार बना हुआ था.
पोस्ट-ऑपरेशन केयर और मिली बड़ी कामयाबी
सफल सर्जरी के बाद असली चुनौती बच्चे को जीवित रखने और संक्रमण से बचाने की थी. नवजात को कई दिनों तक आईसीयू में विशेषज्ञों की चौबीसों घंटे निगरानी में रखा गया. डॉ. समीर ने बताया कि इस दुर्लभ बीमारी में ऑपरेशन के बाद भी एक लंबी उपचार प्रक्रिया चलती है और बहुत कम बच्चे इस गंभीर स्थिति से पूरी तरह उबर पाते हैं. हालांकि. मेहता नर्सिंग होम की नर्सिंग टीम और डॉक्टरों की अटूट मेहनत अंततः रंग लाई. मासूम अब पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य रूप से स्तनपान कर रहा है. उसके शरीर के सभी लक्षण अब पूरी तरह स्थिर हैं. परिजनों ने डॉ. समीर. डॉ. जे. पी. गुप्ता और पूरी टीम का हृदय से आभार व्यक्त किया है. कोटा के चिकित्सा क्षेत्र के लिए यह ऑपरेशन एक बड़ी मिसाल है. जो यह सिद्ध करता है कि अब स्थानीय अस्पतालों में भी उच्च स्तर का इलाज उपलब्ध है.
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Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें
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