Korba News: देसी मुर्गियों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्हें बड़े पिंजरों या महंगे फीड की जरूरत नहीं होती. गौरव यादव ने लोकल 18 से कहा कि मुर्गियों से रोज करीब 20 से 25 अंडे मिलते हैं और समय-समय पर कुछ मुर्गियों की बिक्री भी होती रहती है.
देसी मुर्गियों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्हें बड़े-बड़े पिंजरों या महंगे फीड की जरूरत नहीं होती. गौरव लोकल 18 को बताते हैं कि मुर्गियों से रोज लगभग 20 से 25 अंडे प्राप्त होते हैं और समय-समय पर कुछ मुर्गियों की बिक्री भी होती रहती है. इससे उन्हें हर महीने लगभग 20 हजार से 25 हजार रुपये तक की आय हो जाती है. वहीं डेयरी व्यवसाय में भी उन्हें अच्छी सफलता मिल रही है. दो गायों से शुरू हुआ दूध का कारोबार अब 30 गायों तक पहुंच चुका है. दूध उत्पादन और बिक्री के साथ-साथ उन्होंने फीड और श्रम लागत को नियंत्रित रखने की रणनीति अपनाई है. इस मॉडल के जरिए उन्हें हर महीने लगभग 90 हजार रुपये तक की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है.
स्थानीय अनाज और चारे का उपयोग
उन्होंने शहर में देसी अंडे और ताजे दूध की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए अपना व्यवसाय विकसित किया. साथ ही महंगे औद्योगिक फीड की बजाय स्थानीय अनाज और चारे का उपयोग किया और परिवार के सदस्यों को भी काम में शामिल किया. गौरव अपने फार्म में जल्द ही एक छोटी प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करना चाहते हैं, जहां दूध से पनीर और दही जैसे उत्पाद बनाए जा सकें और अंडों की पैकेजिंग को भी बेहतर बनाया जा सके. उनका लक्ष्य है कि अगले दो वर्षों में उनके फार्म में 100 गायें और 1000 मुर्गियां हों और आय को दोगुना किया जा सके.
आर्थिक स्थिति को नई दिशा
गौरव यादव की यह कहानी दिखाती है कि छोटे स्तर से शुरू किया गया प्रयास भी यदि समर्पण और सही रणनीति के साथ किया जाए, तो वह न केवल व्यक्तिगत सफलता दिला सकता है बल्कि आर्थिक स्थिति को भी नई दिशा दे सकता है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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