Kondagaon Transformation: कोंडागांव के हड़ेली गांव में कभी नक्सलियों की जन अदालत लगने वाली जगह आज मंदिर और घंटियों की गूंज से पहचानी जाती है. जिस पेड़ के नीचे डर और हिंसा के बीच लोगों की किस्मत तय होती थी, वहां अब ग्रामीण पूजा-अर्चना कर रहे हैं. यह बदलाव बदलते बस्तर की कहानी है, जो लाल आतंक से शांति और हिंसा से आस्था की जीत को दिखाता है.
गांवों में अब हालात पूरी तरह बदले
रानापाल-हड़ेली और आसपास के गांवों में अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. वर्षों तक नक्सली हिंसा के कारण सहमे रहने वाले ग्रामीण अब खुले तौर पर अपने धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में हिस्सा ले रहे हैं. बच्चों की हंसी, महिलाओं के गीत और बुजुर्गों की बातचीत से इलाके में एक नई जिंदगी लौट आई है. इस सकारात्मक परिवर्तन में सुरक्षा बलों की अहम भूमिका रही है. क्षेत्र में तैनात जवान लगातार गश्त कर रहे हैं और गांवों में लोगों से संवाद भी बढ़ा रहे हैं. जवानों के “भारत माता की जय” के नारों से अब पूरा इलाका गूंज उठता है, जो कभी डर और सन्नाटे का गढ़ माना जाता था. सुरक्षा की मजबूत मौजूदगी ने लोगों के मन से भय को काफी हद तक दूर कर दिया है.
ग्रामीणों के मुताबिक, यह बदलाव उनके लिए किसी सपने से कम नहीं है. जहां कभी जन अदालत के नाम पर अत्याचार होता था, आज वहां शांति, श्रद्धा और विकास की नई राह दिखाई दे रही है. रानापाल-हड़ेली इलाके में मंदिर की घंटियों और भजनों की गूंज यह संदेश दे रही है कि हिंसा पर शांति की जीत संभव है और विश्वास के साथ आगे बढ़ा जाए तो बदलाव जरूर आता है.
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