सालाना होता है 300000 का मुनाफा
किसान चौकिंदर सिंह का मानना है कि पलायन के बजाय आप अपने मेहनत से कृषि के क्षेत्र में भी अच्छी आमदनी कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि वे इंटर पास करने के बाद से ही इस क्षेत्र को चुने और अपने माता पिता को देखकर खेती बाड़ी का कार्य सीखें और खेती बाड़ी का कार्य कर रहे हैं. इतना ही नहीं, वे खेती बाड़ी के कार्य से सलाना लाखों रुपए कमा रहे हैं. साथ ही घर परिवार चलाने अपने बच्चों को बाहर शिक्षा देने के साथ साथ सालाना लगभग 300000 रुपए की बचत भी कर रहे हैं.
जानें किसान ने खेती को लेकर क्या बताया
किसान चौकिंदर सिंह ने लोकल 18 को बताया कि वह गुमला जिले के रायडीह प्रखंड के सुदूरवर्ती कांसीर गांव का रहने वाले हैं. उन्होंने बताया कि वे मध्य प्रदेश से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई करने के बाद खेती-बाड़ी के क्षेत्र में अपना कदम रखे. जहां खेती बाड़ी से ही पूरे परिवार का भरण पोषण हो जाता है. वह 1993-94 ईस्वी में लगभग में इंटर पास करने के बाद अपने माता-पिता से खेती करने का तरीका सीखा एवं खेती बाड़ी करते आ रहे हैं. उनका मुख्य व्यवसाय कृषि कार्य ही है. इसी से पूरे परिवार का पालन पोषण भी करते हैं.
9 एकड़ भूमि पर किया था धान की खेती
उन्होंने बताया कि लगभग 9 एकड़ जमीन पर धान की खेती किया था, जिसमें काफी अच्छी फसल हुई. वह वर्तमान में अपनी जमीन डेढ़ एकड़ जमीन में मटर की खेती किए हुए हैं. वहीं, इंटरनेट पर उपलब्ध वीडियो देखकर वह आधुनिक खेती की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं. इंटरनेट पर वीडियो देखकर खेती की नई तकनीक, बीजों की जानकारी एवं उर्वरकों की जानकारी लेकर मटर की खेती किए हुए हैं. हमारी पारंपरिक पुरानी कृषि पद्धति एवं इंटरनेट के वीडियो के आधार पर दोनों को मिलाकर आधुनिक तरीके से अभी खेती कर रहे हैं. उन्हें अपनी मेहनत पर विश्वास है कि उनकी फसल अच्छी होगी.
खेती के साथ करते हैं राजनीति
किसान ने बताया कि इतना ही नहीं, उन्होंने 2015 ई में जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़े और रायडीह प्रखंड का जिला परिषद सदस्य बने. वह अपने कार्यकाल के दौरान जनता की सेवा करने के साथ-साथ खेती बाड़ी का कार्य भी करते हैं. फिलहाल पूर्ण रूप से खेती-बाड़ी के कार्य से ही जुड़े हुए हैं. इसी खेती से उनका पूरा परिवार चलता है. वहीं, वह अपने बच्चों की पढ़ाई लिखाई भी बाहर करवा रहा हैं. वह मटर के अलावा आलू, प्याज ,धनिया पत्ता, पालक साग, चना ,सरसो आदि भी लगाए हुए हैं. वह इन सब को बाजार में बेचते हैं. इतना ही नहीं, वह सारे खर्च के बावजूद खेती से लगभग 3 लाख रुपये आसानी से कमा लेते हैं.
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