Khandwa News: टैगोर कॉलोनी व आदर्श नगर, व अन्य कॉलोनी की महिलाओं का दर्द टैगोर कॉलोनी की रहने वाली अनीता धोत्रे बताती है पानी इतना गंदा आता है कि जैसे गन्ने का जूस हो. कभी पीला, कभी हरा, कभी झाग वाला. सफेद पानी के दर्शन तो आज तक नहीं हुए. कई बार ऐसा लगता है कि नगर निगम नाली का पानी ही सप्लाई कर रहा है. अनीता बताती है कि उन्होंने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में केस लगाया है. निगम ने कोर्ट में कहा कि हम आरओ जैसा पानी दे रहे है.
टैगोर कॉलोनी व आदर्श नगर, व अन्य कॉलोनी की महिलाओं का दर्द टैगोर कॉलोनी की रहने वाली अनीता धोत्रे बताती है पानी इतना गंदा आता है कि जैसे गन्ने का जूस हो. कभी पीला, कभी हरा, कभी झाग वाला. सफेद पानी के दर्शन तो आज तक नहीं हुए. कई बार ऐसा लगता है कि नगर निगम नाली का पानी ही सप्लाई कर रहा है. अनीता बताती है कि उन्होंने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में केस लगाया है. निगम ने कोर्ट में कहा कि हम आरओ जैसा पानी दे रहे है. लेकिन पाइप लाइन नालियों में पड़ी है. इसी वजह से मैंने कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट लगाया है. पहले केस में जनता की जीत हुई थी. अब इस केस में सजा की मांग की है.
अनीता आगे कहती है कि मैं अकेली महिला होकर लड़ रही हूं. लोग कहते हैं साथ हैं लेकिन आगे कोई नहीं आता. अगर सब डर जाएंगे तो लड़ेगा कौन? झांसी की रानी भी अकेली थी. सावित्रीबाई फुले भी अकेली थी. किसी को तो आगे आना पड़ेगा.
टैगोर कॉलोनी की अन्य महिलाएं बताती है कि गंदे पानी की वजह से लोग बीमार पड़ने लगे थे. किसी के घर में डबल फिल्टर लगे है तो कोई हर महीने आरओ केन मंगवाकर पानी पी रहा है. एक महिला कहती है कि हम 200 रुपए हर महीने पानी के लिए देते है. लेकिन पीने का साफ पानी आज तक नहीं मिला. वहीं, 65 साल की एक बुजुर्ग महिला कहती है कि मैंने तो यहां कभी साफ पानी आते देखा ही नहीं. पूरे खंडवा का यही हाल है. आदर्श नगर और लाल चौकी का हाल भी वही है.
आदर्श नगर और लाल चौकी की महिलाओं ने भी LOCAL 18 को बताया कि यहां सालों से गंदा पानी आ रहा है. पानी ऐसा आता है जैसे नाली से उठाकर दे रहे हो. शिकायत करते है लेकिन सिर्फ कागजों में समाधान होता है. LOCAL 18 की पड़ताल में साफ दिखा कि कई जगह नालियों के अंदर से पानी की लाइन डली है. अब सवाल यह है कि अगर खंडवा में भी इंदौर जैसा हादसा हो गया, तो जिम्मेदार कौन होगा?
शहर की जनता सालों से गंदा पानी पीने को मजबूर है. लेकिन नगर निगम, जिम्मेदार अफसर और जनप्रतिनिधि अब तक नहीं जागे है. क्या किसी बड़ी घटना के बाद ही सिस्टम हरकत में आएगा. यही सबसे बड़ा सवाल है.
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