सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप जेल सुधारों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पहले से गठित जेल सुधार समिति अब पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में कैदियों की सजा में छूट (रिमिशन) और समय से पहले रिहाई (प्रीमैच्योर रिलीज) की नीतियों को मोनीटर व सुपरवाइज करेगी। चीफ जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कैदियों को रिमिशन और समयपूर्व रिहाई से जुड़े मुद्दों पर स्वतः संज्ञान लिया है और सभी हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वे जेल सुधारों के हिस्से के तौर पर इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करें। जेल सुधारों को देखने के लिए एक समिति पहले से गठित है। अब इसी समिति को पंजाब, हरियाणा और यूटी चंडीगढ़ में रिमिशन और समयपूर्व रिहाई की नीतियों को मोनीटर व सुपरवाइज का कार्य सौंपा जाएगा। पंजाब-हरियाणा दो सप्ताह में दाखिल करें जवाब हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि पंजाब और हरियाणा सरकार की ओर से जवाब तैयार हैं। इस पर अदालत ने दोनों राज्यों को दो सप्ताह के भीतर शपथपत्र (एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर स्वतः संज्ञान लिया। हाईकोर्ट में चल रही यह स्वतः संज्ञान कार्यवाही, देशभर में जेलों की भीड़ कम करने, देरी की समस्याओं को दूर करने और रिमिशन व समयपूर्व रिहाई की प्रक्रिया को निष्पक्ष, समयबद्ध और समान बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की अगुवाई में चल रहे व्यापक न्यायिक प्रयास का हिस्सा है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा था कि हम सभी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से अनुरोध करते हैं कि वे स्वतः संज्ञान याचिका दर्ज करें और फिर एक खंडपीठ गठित कर अपने अपने राज्यों में रिमिशन और समयपूर्व रिहाई की नीतियों के क्रियान्वयन की निगरानी करें। इसलिए अब हाईकोर्ट ने उक्त आदेश जारी किए हैं।
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