झुंझुनू का स्वर्ण जयंती स्टेडियम एक अलग ही ऊर्जा से लबरेज है। मौका है ‘विश्व सामाजिक न्याय दिवस’ का। मैदान सजा है जिले के उन जांबाज खिलाड़ियों के लिए, जिन्होंने अपनी शारीरिक चुनौतियों को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। जिला प्रशासन समाज कल्याण और खेल विभाग की इस संयुक्त पहल ने आज स्टेडियम को Suddenly खिलाड़ियों के जज्बे से भर दिया है। उपनिदेशक डॉ. पवन पूनिया और जिला खेल अधिकारी राजेश ओला की मौजूदगी में प्रतियोगिता का आगाज हुआ। उद्घाटन के साथ ही स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। जिले के कोने-कोने से आए दिव्यांग खिलाड़ी अपनी व्हीलचेयर और ट्राइसइकिल के साथ ट्रैक पर डटे हुए हैं। 100 मीटर की दौड़ और व्हीलचेयर रेस के राउंड में खिलाड़ियों में उत्साह नजर आया। व्हीलचेयर रेस, 50 मीटर और 100 मीटर रेस, शॉटपुट (गोला फेंक) और डिस्कस थ्रो के मुकाबले चल रहे हैं, जहाँ खिलाड़ी अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। म्यूजिकल चेयर और चेस (शतरंज) जैसी प्रतियोगिताओं में खिलाड़ी जोश के साथ भाग ले रहे हैं। उपनिदेशक पवन पूनिया ने बताया कि हमारा उद्देश्य सिर्फ खेल नहीं, बल्कि एक समान अधिकार वाला प्लेटफॉर्म देना है। आज इन खिलाड़ियों के चेहरे की मुस्कान बता रही है कि अगर अवसर मिले, तो ये भी सामान्य व्यक्ति की तरह हर लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। जिला खेल अधिकारी राजेश ओला ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि आज इन खिलाड़ियों का जो मनोबल दिख रहा है, वह भविष्य के पैरालंपिक खिलाड़ियों की नींव रखेगा। इस मौके विनोद सैनी (आशा का झरना), विजेंद्र भाटिया (पीरामल फाउंडेशन), राकेश सिरोवा (राजस्थान दिव्यांग सेवा संस्थान) और अरुण कुमार (परमहंस संस्थान) की टीमें फील्ड पर मुस्तैद हैं। संस्थाओं के वॉलिंटियर्स खिलाड़ियों को ट्रैक तक लाने और उनकी हौसला अफजाई करने में जुटे हैं।
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