कम लागत में घर पर करें तैयार
कृषि एक्सपर्ट ने आगे बताया कि जीवामृत बनाने की विधि बेहद सरल है और किसान इसे घर पर ही तैयार कर सकते हैं. इसके लिए 10 किलो देसी गाय का गोबर, 10 लीटर गोमूत्र, एक किलो गुड़, एक किलो चना दाल का कुटा मिश्रण या कोई भी दलहन लिया जा सकता है. यदि उपलब्ध हो तो एक किलो सड़े हुए फल का गूदा भी मिलाया जा सकता है. साथ ही बरगद या पीपल के पेड़ के नीचे की मिट्टी डालने से इसमें सूक्ष्म जीवाणुओं की मात्रा और बढ़ जाती है.
जीवामृत बनाने की प्रक्रिया
जीवामृत तैयार करने के लिए लगभग 200 लीटर क्षमता वाला ड्रम लें और उसमें 100 लीटर पानी भरें. इसके बाद सभी सामग्री डालकर लकड़ी से घड़ी की दिशा में अच्छी तरह मिलाएं. ड्रम को ढककर छायादार स्थान पर कम से कम 4 से 5 दिन तक रखें. इस दौरान दिन में एक-दो बार घोल को हिलाते रहें. तय समय के बाद जीवामृत उपयोग के लिए पूरी तरह तैयार हो जाता है.
खेत में उपयोग के अलग-अलग तरीके
तैयार जीवामृत को सीधे खेत में सिंचाई के पानी के साथ, ड्रिप सिंचाई के माध्यम से या पौधों की जड़ों में दिया जा सकता है. इससे मिट्टी भुरभुरी होती है और पौधों को आवश्यक पोषक तत्व आसानी से मिलते हैं. यदि खड़ी फसल में छिड़काव करना हो, तो एक लीटर जीवामृत को 10 से 15 लीटर पानी में घोलकर फसल पर छिड़काव किया जा सकता है.
घनजीवामृत भी कारगर विकल्प
जीवामृत को ठोस रूप में भी बनाया जा सकता है, जिसे घनजीवामृत कहा जाता है. इसके लिए 10 किलो गोबर की ढेरी बनाकर उसमें गोमूत्र, एक किलो गुड़ और एक किलो चना या किसी भी दलहन का चूर्ण मिलाया जाता है. इसे छायादार स्थान पर सुखाकर रखा जाता है और जरूरत पड़ने पर खेत में डालकर उपयोग किया जाता है.
सभी फसलों के लिए फायदेमंद
जीवामृत दलहन, तिलहन, सब्जी वर्ग और अनाज समेत सभी प्रकार की फसलों के लिए लाभकारी है. यह रासायनिक खादों की तुलना में सस्ती होने के साथ-साथ पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए भी सुरक्षित है.
किसानों की घटेगी लागत
जहां रासायनिक खादों पर किसानों को भारी खर्च करना पड़ता है, वहीं जीवामृत को किसान खुद घर पर तैयार कर सकते हैं. इससे खेती की लागत कम होती है और मिट्टी की उर्वरक शक्ति लंबे समय तक बनी रहती है, जो टिकाऊ और लाभकारी खेती की दिशा में एक बड़ा कदम है.
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