नागौर जिले में जाट समाज ने सामाजिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बढ़ती कुरीतियों, दिखावे और अनावश्यक खर्च पर अंकुश लगाने का निर्णय लिया है। रविवार को कस्बे में आयोजित आम सभा में समाज के बुजुर्गों, युवाओं और प्रमुख सदस्यों ने विस्तृत चर्चा के बाद सात प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए। इन प्रस्तावों का उद्देश्य विवाह, मृत्यु संस्कार और अन्य सामाजिक आयोजनों में सादगी अपनाकर परिवारों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करना है।
विवाह और मायरे से जुड़ी परंपराओं में बदलाव
सभा में निर्णय लिया गया कि विवाह समारोह में गीत गवाई (घोड़ियां गवाई) और बर्तन बांटने की परंपरा पूरी तरह बंद रहेगी। मायरे में परिवार के सदस्यों के अलावा ‘बेस’ (भैंस आदि) देने की प्रथा समाप्त की गई है और केवल नकद राशि देने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही पेरावणी, यानी पहनावे संबंधी लेन-देन को घर के अंदर भी पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया।
मृत्यु संस्कारों में सादगी का प्रावधान
मृत्यु संस्कारों में सादगी बरतने पर विशेष जोर दिया गया। 11वें और 12वें दिन केवल एक प्रकार की मिठाई तथा सब्जी-पूड़ी बनाने का निर्णय लिया गया, जबकि अन्य दिनों में केवल चाय की व्यवस्था होगी। मोखाण में साथ आने वाली महिलाओं को कपड़े देने की बजाय नकद राशि देने की अनुमति दी गई है। 12वें के बाद छपरा कूट की परंपरा बंद रहेगी। बुआ-फूफा की मृत्यु पर शोक बैठक को एक दिन तक सीमित रखने का भी निर्णय लिया गया।
नियम उल्लंघन पर कार्रवाई का संकेत
सभा में स्पष्ट किया गया कि इन नियमों का उल्लंघन करने वाले सदस्य के खिलाफ सामाजिक जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि शादी में डीजे बजाने और सोने की मात्रा 5 तोला निर्धारित करने के प्रस्ताव पर इस बैठक में सहमति नहीं बन सकी। इन विषयों पर दीपावली पर प्रस्तावित अगली बैठक में पुनः विचार किया जाएगा।
आर्थिक बोझ कम करने पर जोर
समाज के प्रमुखों ने कहा कि दिखावे और फिजूलखर्ची के कारण कई परिवार कर्ज में डूब रहे हैं और छोटे-बड़े परिवारों के बीच असमानता बढ़ रही है। प्रस्तावों का उद्देश्य परंपराओं को बनाए रखते हुए आर्थिक संतुलन स्थापित करना और सामाजिक एकजुटता को मजबूत करना है।
प्रमुख सदस्यों की उपस्थिति
बैठक में रोल प्रशासक मनफूल सिंह डिडेल, बाबूलाल रातंगवाल, नरेंद्र डिडेल, ओमप्रकाश डिडेल, खेराजराम, रामकुंवार डिडेल, जीवणराम डिडेल, गंगाराम डिडेल, सुखराम, हरकाराम डिडेल सहित अनेक समाजबंधु उपस्थित रहे। नागौर जिले के अन्य गांवों जैसे पादूकलां और रियांबड़ी क्षेत्र में भी हाल ही में सामाजिक सुधार के समान फैसले लिए गए हैं। समाज में युवाओं की सक्रियता से इन बदलावों को गति मिलती दिखाई दे रही है।
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