Jamshedpur Free Thalassemia Camp: जमशेदपुर में यहां कल यानी 10 जनवरी को फ्री थैलीसिमिया चेकअप कैम्प लगेगा जिसमें बच्चों का इलाज और जांचें की जाएंगी. जिन बच्चों को रक्त संबंधी कोई विकार है, उनके माता-पिता तय समय पर शिविर में शामिल होकर इस मौके का फायदा उठा सकते हैं.
जमशेदपुर और कोल्हान क्षेत्र के उन परिवारों के लिए यह एक बड़ी राहत भरी खबर है, जिनके बच्चे थैलेसीमिया या सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर रक्त संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं. राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 10 जनवरी 2026 को सदर अस्पताल, जमशेदपुर में एक विशेष नि:शुल्क जांच शिविर का आयोजन किया जा रहा है. इस शिविर का उद्देश्य पीड़ित बच्चों को बेहतर इलाज और एक सामान्य जीवन की ओर ले जाना है.

यह जांच शिविर सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक सदर अस्पताल परिसर में आयोजित होगा. शिविर का आयोजन नारायण हॉस्पिटल, कोलकाता और ब्रह्मानंद नारायण हॉस्पिटल के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है. खास बात यह है कि इस शिविर में बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण HLA (ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन) जांच पूरी तरह नि:शुल्क की जाएगी, जो आमतौर पर काफी महंगी होती है.

शिविर में नारायण हेल्थ, कोलकाता के जाने-माने हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. शिशिर कुमार पात्रा अपनी विशेषज्ञ टीम के साथ मौजूद रहेंगे. वे बच्चों की जांच कर परामर्श देंगे और यह तय करेंगे कि किन मरीजों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट संभव है. जिन बच्चों में ट्रांसप्लांट की संभावना पाई जाएगी, उनका इलाज झारखंड सरकार और सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से नारायण हेल्थ द्वारा नि:शुल्क किया जाएगा, जो जरूरतमंद परिवारों के लिए एक बड़ी उम्मीद है.
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यह शिविर विशेष रूप से 12 वर्ष से कम आयु के उन बच्चों के लिए है, जो थैलेसीमिया या सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित हैं. जांच के लिए बीमार बच्चे के साथ उनके माता-पिता और भाई-बहन का आना भी जरूरी है, क्योंकि HLA मैचिंग के लिए परिवार के सदस्यों की जांच की जाती है. सही मैच मिलने पर बोन मैरो ट्रांसप्लांट से बच्चे को स्थायी रूप से स्वस्थ जीवन मिल सकता है.

कोल्हान क्षेत्र में थैलेसीमिया की स्थिति चिंताजनक है. आंकड़ों के अनुसार कोल्हान में कुल 1564 बच्चे थैलेसीमिया से पीड़ित हैं, जिनमें से अकेले पूर्वी सिंहभूम में 461 बच्चे रजिस्टर्ड हैं. सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल के अनुसार, थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसमें शरीर पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता. समय पर जांच और सही इलाज, विशेषकर बोन मैरो ट्रांसप्लांट, से बच्चा पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकता है. ऐसे में यह शिविर न सिर्फ जांच का अवसर है, बल्कि कई बच्चों के लिए “जीवनदान” साबित हो सकता है.
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