Jamshedpur MGM Hospital Facility: जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में 15 जनवरी से आयुष्मान भारत योजना के तहत भर्ती बच्चों को सभी जरूरी दवाइयां अस्पताल में ही मिलेंगी. इससे गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी. पहले उन्हें कई दवाइयों की खरीदारी के लिए बाहर जाना पड़ता था.
जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में इलाज कराने वाले बच्चों और उनके परिजनों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है. अब अस्पताल में भर्ती बच्चों को इलाज के दौरान जरूरी सभी दवाइयां आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पताल से ही उपलब्ध कराई जाएंगी. इस नई व्यवस्था से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को बड़ी सहूलियत मिलेगी, क्योंकि अब उन्हें दवाइयों के लिए बाहर भटकना नहीं पड़ेगा.

अस्पताल प्रबंधन द्वारा लिया गया यह निर्णय 15 जनवरी से लागू किया जा रहा है. खासतौर पर शिशु रोग विभाग, एनआईसीयू और पीआईसीयू में भर्ती बच्चों को इसका सीधा लाभ मिलेगा. इससे पहले स्थिति यह थी कि कई जरूरी दवाइयां अस्पताल में उपलब्ध नहीं रहती थीं, ऐसे में परिजनों को मजबूरी में बाहर से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ती थीं. इससे न सिर्फ आर्थिक बोझ बढ़ता था, बल्कि इलाज में भी देरी हो जाती थी.

शिशु रोग विभाग के एचओडी डॉक्टरों ने बताया कि आयुष्मान योजना लागू होने के बाद अब अस्पताल में भर्ती बच्चों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां सीधे आयुष्मान के माध्यम से मंगाई जाएंगी. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि गरीब परिवारों के बच्चे बिना किसी रुकावट के समय पर इलाज पा सकेंगे. डॉक्टरों के अनुसार, प्राण-रक्षक दवाइयों की उपलब्धता से बच्चों की सेहत में तेजी से सुधार होगा.
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फिलहाल एमजीएम अस्पताल के शिशु रोग विभाग में करीब 60 बेड उपलब्ध हैं, जिनमें से औसतन 35 बच्चे इस समय भर्ती होकर इलाज करा रहे हैं. ठंड के मौसम में वायरल फीवर, सर्दी-खांसी और सांस से जुड़ी समस्याओं के कारण बच्चों की संख्या बढ़ जाती है. कई बार ऐसी दवाइयां लिखी जाती हैं, जो अस्पताल में नहीं मिलती थीं और बाहर से खरीदनी पड़ती थीं, लेकिन अब यह समस्या खत्म हो जाएगी.

डॉक्टरों ने यह भी बताया कि एमजीएम अस्पताल की बच्चा ओपीडी में रोजाना 60 से 70 बच्चे इलाज के लिए पहुंचते हैं. आयुष्मान योजना से जुड़ने के बाद अब इन बच्चों को बेहतर और सुलभ इलाज मिल सकेगा. अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि यह व्यवस्था आगे भी और मजबूत की जाएगी, ताकि किसी भी मरीज को किसी तरह की परेशानी न हो.
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