जिले के एक सस्पेंड व्याख्याता द्वारा ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या करने का मामला सामने आया है। घटना बुधवार शाम जयपुर के महेश नगर थाना क्षेत्र में अर्जुन नगर रेलवे फाटक के पास हुई, जहां ट्रेन के आगे कूदने से सस्पेंड व्याख्याता मनोहरलाल भादू की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक मूल रूप से जालौर जिले के सांचौर निवासी थे।
घटना के कुछ समय बाद मनोहरलाल भादू का कथित सुसाइड नोट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसने मामले को गंभीर मोड़ दे दिया। वायरल नोट में उन्होंने अपनी मौत को आत्महत्या नहीं, बल्कि इरादतन हत्या करार दिया है। नोट में उन्होंने पुलिस, विशेष रूप से एसओजी के कुछ अधिकारियों पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने लिखा- मैं मरा नहीं हूं, पुलिस ने मेरी इरादतन हत्या कर दी है।
सुसाइड नोट में मनोहरलाल ने दावा किया कि अजमेर एसओजी में दर्ज एक प्रकरण में उनका नाम न तो एफआईआर में था और न ही चालान में, इसके बावजूद उन्हें जबरन आरोपी बनाया गया। उन्होंने लिखा कि 2022 या उससे पहले की कुछ घटनाओं को आधार बनाकर उन्हें बार-बार जांच के दायरे में लाया गया। एक अन्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उन्हें भी मामले में शामिल कर लिया गया।
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उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के दौरान उन पर पैसों को लेकर दबाव बनाया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। नोट में उन्होंने यह भी लिखा कि वे पिछले चार वर्षों से आर्थिक संकट से जूझ रहे थे और दोस्तों से उधार लेकर जीवन-यापन कर रहे थे। कोर्ट की तारीखें, कानूनी खर्च और लगातार आरोपों ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया।
मनोहरलाल ने अपने सुसाइड नोट में दोस्तों से भावुक अपील करते हुए अपने परिवार की मदद करने की बात कही। उन्होंने यह भी इच्छा जताई कि उनकी व्याख्याता की नौकरी पर किसी को अनुकंपा नियुक्ति मिले। उन्होंने लिखा कि वह 20 सदस्यीय परिवार में एकमात्र कमाने वाले थे और उनके तीन छोटे बच्चों की जिम्मेदारी उन पर थी। उनकी पत्नी और बच्चे फिलहाल गांव में रहते हैं।
घटना की सूचना मिलने पर जयपुर की महेश नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। थाना प्रभारी सुरेश यादव ने बताया कि पुलिस के पास अभी तक कोई आधिकारिक सुसाइड नोट प्राप्त नहीं हुआ है और सोशल मीडिया पर वायरल नोट की सत्यता की जांच की जा रही है। वहीं एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने कहा कि यदि किसी अधिकारी पर आरोप लगाए गए हैं तो पूरे मामले की तथ्यों के साथ जांच कराई जाएगी। इस घटना के बाद सांचौर और जयपुर सहित कई क्षेत्रों में शोक और आक्रोश का माहौल है। सोशल मीडिया पर लोग मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। सस्पेंड व्याख्याता की मौत और वायरल सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों ने एक बार फिर जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और मानसिक दबाव जैसे मुद्दों को चर्चा में ला दिया है।
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