यह अवमानना याचिका राजस्थान के आठ कार्यरत जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग अधिकारियों, जिनमें जयह्री शर्मा और अन्य शामिल हैं. सिविल अपील संख्या 9982/2024 में दायर की गई थी. याचिकाकर्ताओं ने 21.05.2025 को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय गणेश कुमार राजेश्वरराव सेलुकर बनाम महेंद्र भास्कर लिमये (2025 SCC OnLine SC 1193) के अनुपालन न होने का आरोप लगाया.
उक्त निर्णय में कोर्ट ने निर्देश दिया था कि उपभोक्ता आयोगों के कार्यरत अध्यक्षों एवं सदस्यों को उनके कार्यकाल की समाप्ति तक अथवा केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचित नए नियमों के तहत नई नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण होने तक, जो भी पहले हो, कार्य जारी रखने की अनुमति दी जाएगी.
याचिका में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 141 एवं 144 के अंतर्गत उक्त निर्णय बाध्यकारी होने के बावजूद नई भर्ती के लिए नए नियम अधिसूचित नहीं किए गए और कार्यरत सदस्यों की समान रूप से निरंतरता संबंधी प्रार्थना स्वीकार नहीं की गई, जिससे जिला उपभोक्ता आयोगों के कार्य में बाधा उत्पन्न हुई. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड शुभम जैन ने पैरवी की.
राजस्थान राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा को उपस्थित होने के निर्देश दिए गए. याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सचिव के विरुद्ध अवमानना कार्यवाही प्रारंभ करने से इंकार करते हुए याचिका खारिज कर दी. हालांकि, पीठ ने याचिकाकर्ताओं को यह स्वतंत्रता प्रदान की कि यदि सेवा निरंतरता अथवा पूर्व निर्देशों के क्रियान्वयन से संबंधित कोई शेष अथवा व्यक्तिगत शिकायत हो, तो वे राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं.
इस आदेश के साथ अवमानना कार्यवाही समाप्त हो गई है, जबकि संबंधित पक्षों के लिए सक्षम हाईकोर्ट के सामने उपयुक्त विधिक उपाय खुले रखे गए हैं.
दिल्ली- सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के मुख्य सचिव के विरुद्ध दायर अवमानना याचिका को खारिज करते हुए उन्हें बड़ी कानूनी राहत प्रदान की है. सुप्रीम कोर्ट ने उपभोक्ता आयोग के सदस्यों की ओर से दायर इस मामले की सुनवाई की. याचिकाकर्ताओं ने मुख्य सचिव पर आयोग के अध्यक्षों एवं सदस्यों के कार्यकाल की सुरक्षा संबंधी न्यायिक आदेशों के उल्लंघन का आरोप लगाया था.
शीर्ष अदालत ने याचिका को सीधे सुनने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ताओं को राजस्थान हाईकोर्ट में अपनी शिकायत ले जाने की अनुमति दी है. यह मामला उपभोक्ता आयोगों में कार्यरत पदाधिकारियों के कार्यकाल और सेवा शर्तों के संरक्षण से जुड़ी कानूनी व्याख्या पर केंद्रित है.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.