यह मामला इसलिए भी अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि यह राजस्थान में अब तक की सबसे बड़ी अवैध विस्फोटक बरामदगी है। प्रारंभिक जांच के दौरान NIA और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने अहम इनपुट जुटाए थे। इन्हीं रिपोर्ट्स के आधार पर गृह मंत्रालय ने औपचारिक रूप से केस NIA को ट्रांसफर करने का आदेश जारी किया।
गृह मंत्रालय के आदेश मिलते ही नागौर पुलिस अधीक्षक ने मामले से संबंधित पूरी केस डायरी और सभी जरूरी दस्तावेज NIA को सौंप दिए हैं। अब आगे की जांच, नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने और संभावित आतंकी या संगठित अपराध से जुड़े लिंक की पड़ताल NIA द्वारा की जाएगी।
क्या है पूरा मामला
24 जनवरी को नागौर पुलिस ने थांवला थाना क्षेत्र के हरसौर गांव में कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी सुलेमान खान के घर से करीब 9550 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, भारी मात्रा में डेटोनेटर, और ब्लास्टिंग में इस्तेमाल होने वाले वायर बरामद किए थे। इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक मिलने से बड़े पैमाने पर जनहानि की आशंका जताई गई थी।
सप्लाई नेटवर्क का भी खुलासा
मुख्य आरोपी सुलेमान खान की गिरफ्तारी के बाद पुलिस द्वारा गठित एसआईटी ने उसे विस्फोटक सप्लाई करने वाले चार बड़े सप्लायरों को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया था। रिमांड के दौरान पूछताछ के बाद सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। इसके अलावा, इस मामले में आधा दर्जन से अधिक लोगों को नामजद भी किया जा चुका है।
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अब आगे क्या
अब जब मामला NIA के हवाले हो चुका है, तो एजेंसी द्वारा विस्फोटकों के स्रोत, अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तथा इनके संभावित आतंकी या संगठित अपराध में इस्तेमाल की गहन जांच की जाएगी।
नागौर का यह मामला अब सिर्फ जिला या राज्य स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रकरण बन गया है। आने वाले दिनों में NIA की जांच से कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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