इंदौर के अहिल्या चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के संयुक्त सचिव अक्षय जैन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजकर ऑनलाइन व्यापार के अनियंत्रित विस्तार पर चिंता जताई है। पत्र में कहा गया है कि वर्तमान ऑनलाइन बिजनेस मॉडल देश के छोटे और मध्यम वर्ग के दुकानदारों के लिए बड़ा संकट बन गया है। अक्षय जैन के अनुसार इसके नकारात्मक प्रभाव अब स्थानीय बाजारों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं।
व्यापारियों के समक्ष अस्तित्व का संकट
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उल्लेख किया गया है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स द्वारा दी जाने वाली भारी छूट, कैशबैक और प्राइस डंपिंग की वजह से पारंपरिक बाजारों में ग्राहकों की संख्या लगातार घट रही है। स्थिति यह है कि कई दुकानें बंद होने की कगार पर हैं और हजारों परिवारों की आजीविका पर तलवार लटक रही है। जैन ने तर्क दिया कि पारंपरिक व्यापारी किराया, बिजली, टैक्स और कर्मचारियों का खर्च वहन करता है, जबकि विदेशी पूंजी वाली कंपनियां अनुचित प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।
सख्त नीति निर्धारण की मांग
अक्षय जैन ने सरकार से मांग की है कि ऑनलाइन व्यापार के लिए स्पष्ट और सख्त नियमावली बनाई जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि असीमित डिस्काउंट पर नियंत्रण लगाया जाए और नीति बनाने से पहले व्यापारिक संगठनों से चर्चा की जाए। पत्र में स्पष्ट किया गया कि व्यापारियों की मांग ऑनलाइन व्यापार को पूरी तरह बंद करने की नहीं, बल्कि उसे संतुलित करने की है ताकि डिजिटल प्रगति के साथ-साथ छोटे व्यापारियों का भविष्य भी सुरक्षित रहे।
स्वदेशी के प्रति पुरानी प्रतिबद्धता
गौरतलब है कि अक्षय जैन पूर्व में भी विदेशी उत्पादों के विरोध में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने बांग्लादेशी और चीनी कपड़ों का बहिष्कार करने के साथ उनकी होली भी जलाई थी। वे अपने प्रतिष्ठानों पर स्वदेशी वस्त्र बेचने के पोस्टर लगाकर अन्य व्यापारियों को भी इसके लिए प्रेरित करते रहे हैं।
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