भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते के बाद विदेशी अखरोट के आयात बढ़ने की आशंका से जम्मू-कश्मीर के अखरोट कारोबार पर असर पड़ने लगा है। दामों में 100 रुपये प्रति किलो तक गिरावट दर्ज की गई है जिससे किसान और छोटे व्यापारी संकट में हैं।
देश के कुल अखरोट उत्पादन का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा देने वाले जम्मू-कश्मीर में सीमित उत्पादन के बावजूद बढ़ता आयात बाजार पर दबाव बना रहा है। जम्मू-कश्मीर देश का सबसे बड़ा अखरोट उत्पादक क्षेत्र है। देश में होने वाले कुल अखरोट उत्पादन का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा यहीं से आता है।
राज्य में करीब 86,000 हेक्टेयर भूमि पर अखरोट की खेती होती है। इसके बावजूद देश में विदेशी अखरोट का आयात लगातार बढ़ रहा है जिससे स्थानीय बाजार पर दबाव बन रहा है। वर्ष 2024 में भारत ने करीब 3,785 मीट्रिक टन अखरोट का आयात किया। इनमें सबसे अधिक आपूर्ति अफगानिस्तान, चिली और ऑस्ट्रेलिया से हुई।
इसके मुकाबले अमेरिका से आयात बहुत कम रहा। वहीं भारत से करीब 2,134 मीट्रिक टन अखरोट का निर्यात भी हुआ। व्यापार से जुड़े जानकारों का मानना है कि वे व्यापारी जिन्होंने शरद ऋतु में किसानों से ऊंचे दाम पर अखरोट की खरीद की थी, इस समझौते से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
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