Hyderabad Nizam Story : हैदराबाद की आसिफ़िया लाइब्रेरी में 130 साल पहले मैकेनिकल पुली सिस्टम बनाया गया था, जिसमें पांच लाख दुर्लभ किताबें सुरक्षित हैं और यह तकनीकी विरासत आज भी आकर्षण का केंद्र है. सातवें निज़ाम मीर उस्मान अली खान के शासनकाल में बनी इस लाइब्रेरी की सबसे बड़ी खासियत इसका मैकेनिकल पुली और लिफ्ट सिस्टम था.
सातवें निज़ाम मीर उस्मान अली खान के शासनकाल में बनी इस लाइब्रेरी की सबसे बड़ी खासियत इसका मैकेनिकल पुली और लिफ्ट सिस्टम था. उस दौर के इंजीनियरों ने पाइपलाइन और रेलिंग की ऐसी व्यवस्था तैयार की थी, जिससे दुर्लभ और कीमती पांडुलिपियों को एक मंजिल से दूसरी मंजिल तक बिना किसी मानवीय स्पर्श के पहुंचाया जा सके. इसका मुख्य उद्देश्य किताबों को पसीने, नमी और हाथों की रगड़ से होने वाले नुकसान से बचाना था.
ब्रिटिश आर्किटेक्चर और स्मार्ट इंजीनियरिंग का संगम
1891 में बनी यह भव्य इमारत इंडो-सारासेनिक स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है. लाइब्रेरी की छतें इतनी ऊंची बनाई गई हैं कि बिना पंखों के भी अंदर का तापमान संतुलित रहता है, जिससे सैकड़ों साल पुरानी किताबों और पांडुलिपियों का कागज सुरक्षित रहता है. किताबों के लिए लगाया गया डम्बवेटर यानी छोटी लिफ्ट उस समय की सबसे आधुनिक तकनीक मानी जाती थी.
आसिफ़िया लाइब्रेरी में पांच लाख से ज्यादा किताबें और पांडुलिपियां सुरक्षित हैं. इनमें पांचवीं सदी की ताड़ के पत्तों पर लिखी पांडुलिपियां और तांबे की प्लेट्स पर उकेरे गए प्राचीन लेख भी शामिल हैं. यह लाइब्रेरी आज न केवल हैदराबाद बल्कि पूरे देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण लाइब्रेरी में गिनी जाती है.
विरासत के रूप में आज भी मौजूद तकनीकी चमत्कार
आसिफ़िया लाइब्रेरी में कुल्लियात-ए-कुली कुतुब शाह जैसी नायाब पांडुलिपियां आज भी सुरक्षित रखी गई हैं. निज़ाम काल की वह मैकेनिकल पुली सिस्टम के अवशेष आज भी इस इमारत की विरासत का हिस्सा हैं. यह इस बात का प्रमाण हैं कि उस दौर में हैदराबाद तकनीक, शिक्षा और दूरदर्शिता के मामले में कितना आगे था. आज यह लाइब्रेरी न केवल शोधकर्ताओं का गढ़ है, बल्कि अपनी अनोखी इंजीनियरिंग और ऐतिहासिक महत्व के कारण पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.
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नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
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