Last Updated:
Hyderabad Musi river flood 1908: 1908 में मूसी नदी की भीषण बाढ़ ने हैदराबाद में भारी तबाही मचाई थी. इसी आपदा के दौरान एक विशाल इमली का पेड़ सैकड़ों लोगों के लिए जीवन रक्षक साबित हुआ. बताया जाता है कि करीब 150 लोग इस पेड़ की मजबूत शाखाओं से लटककर या उस पर चढ़कर अपनी जान बचाने में सफल रहे. आज भी यह पेड़ हैदराबाद की विरासत और आपदा में मानव–प्रकृति के अनोखे रिश्ते का प्रतीक माना जाता है.
हैदराबाद: आधुनिकता की दौड़ में भागते हैदराबाद के बीचों-बीच, उस्मानिया जनरल अस्पताल के परिसर में एक पुराना इमली का पेड़ आज भी शान से खड़ा है. यह सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि उस भयानक त्रासदी का गवाह है जिसने 1908 में शहर का भूगोल बदल दिया था. यह कहानी है उस चमत्कारी इमली के पेड़ की, जिसने मूसी नदी के रौद्र रूप के बीच 150 इंसानों को मौत के मुंह से खींच लिया था.
हैदराबाद में लगातार बारिश हो रही थी. देखते ही देखते मूसी नदी ने अपना तट तोड़ दिया. इतिहासकार ज़ाहिद सरकार बताते हैं कि पानी का स्तर 60 फीट तक ऊपर उठ गया था. शहर का एक बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया और हजारों घर ताश के पत्तों की तरह ढह गए. उस समय अफरा-तफरी का माहौल था और लोग अपनी जान बचाने के लिए ऊंचे स्थानों की तलाश में थे.
पेड़ की मजबूत टहनियों पर चढ़ गए
जब उस्मानिया अस्पताल तत्कालीन अफजल गंज अस्पताल के आसपास पानी का सैलाब आया, तो वहां मौजूद लोगों के पास भागने का रास्ता नहीं बचा. ऐसे में करीब 150 लोगों ने अस्पताल परिसर में लगे इस विशाल इमली के पेड़ का सहारा लिया. बच्चे, बूढ़े और जवान, सभी इस पेड़ की मजबूत टहनियों पर चढ़ गए.
बताया जाता है कि ये लोग 24 घंटे से भी अधिक समय तक भूखे-प्यासे पेड़ पर लटके रहे, जबकि उनके नीचे मूसी नदी का उफान सब कुछ बहा ले जाने पर आमादा था. इस पेड़ की मजबूती ने उन 150 लोगों को गिरने नहीं दिया और अगली सुबह जब पानी उतरा, तो वे सुरक्षित नीचे आए.
117 साल बाद भी यह पेड़ हरा-भरा
117 साल बाद भी यह पेड़ हरा-भरा है. स्थानीय लोग इसे पवित्र मानते हैं. हर साल 28 सितंबर को लोग यहां इकट्ठा होते हैं पेड़ को माला पहनाते हैं और उन पूर्वजों को याद करते हैं जिनकी जान इस पेड़ ने बचाई थी. प्रसिद्ध उर्दू कवि अमजद हैदराबादी भी उन्हीं खुशनसीबों में से एक थे जो इस पेड़ पर चढ़कर बचे थे, हालांकि उन्होंने अपने परिवार को उसी बाढ़ में खो दिया था.
कुदरत के करिश्मे का जीवंत स्मारक बना हुआ
समय के साथ इस ऐतिहासिक पेड़ की हालत पर पर्यावरणविदों ने चिंता जताई है. हालांकि अस्पताल प्रशासन और स्थानीय संगठन इसकी देखभाल करते हैं लेकिन यह पेड़ आज भी उस दौर की तबाही और कुदरत के करिश्मे का जीवंत स्मारक बना हुआ है.
About the Author
With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18 in Rajasthan Team. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion…और पढ़ें
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.