मध्य प्रदेश के सागर जिला कलेक्ट्रेट परिसर में मंगलवार को उस समय युद्ध का मैदान बन गया, जब अपनी शिकायत लेकर पहुंचे ग्रामीणों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हो गई। आक्रोशित ग्रामीणों ने न केवल नारेबाजी की, बल्कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों और गोपालगंज थाना प्रभारी (TI) के साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई भी की। घटना के बाद कलेक्ट्रेट में अफरा-तफरी का माहौल है और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत बहेरिया थाना क्षेत्र से हुई। बताया जा रहा है कि रविदास जयंती के अवसर पर झंडा लगाने को लेकर दो पक्षों में विवाद और मारपीट हुई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि घटना की शिकायत करने के बावजूद बहेरिया पुलिस ने उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की। पुलिस की इसी ‘सुस्ती’ और एकपक्षीय कार्रवाई से नाराज ग्रामीण न्याय की गुहार लगाने जिला कलेक्टर के पास पहुंचे थे।
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नारेबाजी के दौरान भड़की हिंसा
ग्रामीण जब कलेक्ट्रेट पहुंचे, तो उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, जिससे विवाद गहरा गया। देखते ही देखते करीब एक दर्जन से अधिक महिला-पुरुष ग्रामीण पुलिसकर्मियों से भिड़ गए। इस दौरान गोपालगंज थाना प्रभारी और अन्य स्टाफ के साथ जमकर हाथापाई हुई।
कलेक्ट्रेट गेट पर धरना शुरू
झड़प के बाद गुस्साए ग्रामीण कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर ही धरने पर बैठ गए हैं। उनकी मांग है कि जब तक आरोपियों पर केस दर्ज नहीं होता और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं होती, वे वहां से नहीं हटेंगे।
पुलिस का पक्ष
पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है। शासकीय कार्य में बाधा डालने और पुलिस के साथ अभद्रता करने वालों को चिह्नित किया जा रहा है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात कर दिया गया है। प्रशासन अब दोनों पक्षों से बातचीत कर मामले को शांत कराने की कोशिश कर रहा है।
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