धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण का सूतक 9 घंटे पूर्व से प्रभावी हो जाता है। इस आधार पर 3 मार्च को सुबह 6:20 बजे से सूतक काल प्रारंभ होगा। सूतक के दौरान मंदिरों के कपाट बंद रखने, भोजन न पकाने और विशेष धार्मिक सावधानियां बरतने की परंपरा है। बालक, वृद्ध और रोगियों के लिए दोपहर 12:20 बजे से सूतक मानने की सलाह दी गई है।
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ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में रहेगा। पूर्वोत्तर भारत के कुछ राज्यों में इसका प्रभाव अधिक स्पष्ट रहने की संभावना है। यह ग्रहण भारत के अलावा यूरोप, एशिया, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका के कई हिस्सों में भी दिखाई देगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में जप, तप, हवन, तर्पण और दान का विशेष महत्व है। ग्रहण मोक्ष के बाद स्नान-दान कर पूजा करना शुभ माना गया है।
होलिका दहन 2 मार्च को परंपरा अनुसार किया जाएगा, जबकि 4 मार्च को रंगों के साथ धुरेड़ी का उत्सव मनाया जाएगा। इस बार होली और चंद्रग्रहण के संयोग को धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है।
राशियों पर ग्रहण का प्रभाव (पंचांग अनुसार)
मेष: चिंता
वृष: व्यथा
मिथुन: लक्ष्मी कृपा
कर्क: क्षति
सिंह: कष्ट/घात
कन्या: हानि
तुला: लाभ
वृश्चिक: सुख
धनु: मानहानि
मकर: मृत्यु तुल्य कष्ट
कुंभ: स्त्री पीड़ा
मीन: सौख्य
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
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