एम्स बिलासपुर में मेडिकल शिक्षण कार्यों के लिए असली मानव कंकाल (ह्यूमन स्केलेटन डिसआर्टिकुलेटेड) मंगवाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से मेडिकल छात्रों को पढ़ाई के दौरान वास्तविक अनुभव मिलेगा, जिससे भविष्य के डॉक्टरों की दक्षता और उपचार क्षमता में सुधार होगा।
मेडिकल शिक्षा में मानव शरीर की संरचना को समझना सबसे महत्वपूर्ण आधार होता है। अब तक कई जगहों पर प्लास्टिक मॉडल का उपयोग किया जाता रहा है, लेकिन असली हड्डियों के अध्ययन से छात्रों को अधिक सटीक और गहराई वाला ज्ञान मिलता है। इससे पढ़ाई के साथ-साथ प्रैक्टिकल समझ भी मजबूत होगी। एमबीबीएस और एमडी के विद्यार्थियों को एनाटॉमी विषय के अंतर्गत अस्थि विज्ञान (ऑस्टियोलॉजी) का अध्ययन करना होता है।
असली कंकाल उपलब्ध होने से छात्र हड्डियों की सूक्ष्म बनावट, जोड़ बनने के स्थान, नसों और रक्त वाहिकाओं के मार्ग को प्रत्यक्ष रूप से देख सकेंगे। इसके अलावा अलग-अलग हड्डियों की पहचान करना और शरीर में उनकी सही स्थिति समझना भी आसान होगा। असली हड्डियों का घनत्व और बनावट प्लास्टिक मॉडल से अलग होती है। ऐसे में सर्जरी का अभ्यास करने वाले डॉक्टरों और सर्जनों को वास्तविक ऑपरेशन जैसा अनुभव मिलेगा। इससे जटिल सर्जरी करने की क्षमता और आत्मविश्वास दोनों बढ़ेंगे।
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