होली इस वर्ष 4 मार्च को है। होली से पहले घर लौटने के लिए धनबाद आने वाली ट्रेनों में अभी से मारामारी दिखने लगी है। दिल्ली और दूसरे बड़े शहरों से धनबाद आने वाली सभी ट्रेनें फुल हो चुकी हैं। 25 फरवरी से 3 मार्च के बीच सभी बड़े शहरों से चलने वाली ट्रेनों
मुंबई मेल, एलेप्पी, सूरत-मालदा टाउन, गंगा-सतलज सहित किसी भी ट्रेन में कंफर्म टिकट नहीं मिल रहा है। नेताजी, जलियांवाला बाग आदि में वेटिंग 100 से ऊपर है। जबकि बाड़मेर-हावड़ा में नो रूम हो गया है। वेटिंग लिस्ट बढ़ती जा रही, ऐसे में वेट लिस्ट टिकट का कंफर्म होना मुश्किल है। तत्काल में भी टिकट मिलना आसान नहीं है। बिना आरक्षण के आने की तो सोच भी नहीं सकते। होली में ट्रेनों की जनरल बोगियों में भी पैर तक रखने की जगह नहीं होती।
अभी फ्लाइट के टिकट में कम किराया
धनबाद आने वालों के लिए फ्लाइट का विकल्प बचा है। धनबाद आने के लिए रांची, दुर्गापुर और देवघर की फ्लाइट पकड़ सकते हैं। अगर फ्लाइट से आने की योजना बना रहे हैं तो अभी से टिकट बुक करा लें। अभी टिकट लेने से किराया कम लगेगा। होली से पहले लगभग सभी रूटों की फ्लाइट का किराया दो गुना तक बढ़ जाता है।

सियालदह-अजमेर, हावड़ा-जोधपुर, हावड़ा-मथुरा, कोलकाता-आगरा एक्सप्रेस में 25 फरवरी से 3 मार्च के बीच लंबी वेटिंग चल रही है। (प्रतीकात्मक फोटो)
होली में धनबाद के लोग जाएंगे मथुरा और राजस्थान
होली में धनबाद के लोग बड़ी संख्या में राजस्थान और मथुरा जा रहे हैं। होली से एक महीने पहले की तिथि से ही राजस्थान और मथुरा जाने वाली सभी ट्रेनें फुल हो चुकी हैं। सियालदह-अजमेर, हावड़ा-जोधपुर, बीकानेर दुरंतो, हावड़ा-बीकानेर, कोलकाता-ग्वालियर, हावड़ा-मथुरा, कोलकाता-आगरा एक्सप्रेस में 25 फरवरी से 3 मार्च के बीच लंबी वेटिंग चल रही है।
खाटू श्याम में खजाना लूटने पहुंचते हैं श्रद्धालु
राजस्थान के सीकर जिले के खाटू कस्बे में होली में बड़ी संख्या में श्याम भक्त खाटू श्यामजी का खजाना लूटने आते हैं। साल में एक बार की यह परंपरा है कि धुलंडी को सुबह से अपराह्न तक श्याम भक्त खाटू श्यामजी में होली खेलते हैं। शाम में विशेष फूलडोल आरती के बाद चढ़ावे में से सिक्के प्रसाद के रूप में दिए जाते हैं, जिसे बाबा का खजाना कहते हैं। सिक्के को लोग अपने व्यापार में वृद्धि के लिए गल्लों व तिजोरियों में रखते हैं।

मथुरा की होली होती है अद्भुत
मथुरा की होली सबसे खास होती है। एक महीने तक चलने वाला उत्सव फरवरी में शुरू होकर मार्च में मथुरा होली समारोह के साथ समाप्त होता है। गोकुल, वृन्दावन, बरसाना, नंदगांव से लेकर मथुरा तक में चलने वाले कार्यक्रम मंत्रमुग्ध कर देते हैं। बरसाना की लट्ठमार होली के लिए धनबाद के लोगों में भी खास आकर्षण रहा है।
उदयपुर के ओल्ड सिटी में होली भव्य उत्सव
उदयपुर की ओल्ड सिटी में होली पर भव्य उत्सव होता है। जगदीश मंदिर और गणगौर घाट पर भव्य आयोजन किए जाते हैं। देसी और विदेशी पर्यटक आते हैं। लोक नृत्य और लोक गीत होते हैं, रात को अद्भुत आतिशबाजी होती है। होटल और रिसॉर्ट्स में भी इवेंट होते हैं। लिहाजा इन जगहों के लिए जानेवाली ट्रेनें हमेशा फुल रहती हैं।
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