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ग्रामीणों ने बताया कि किले तक पहुंचने वाले रास्ते भी जर्जर हालत में हैं। खराब सड़कों और सुविधाओं के अभाव में पर्यटक यहां आने से कतराने लगे हैं। इसका सीधा असर क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं पर पड़ रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते संरक्षण और मरम्मत का काम शुरू नहीं किया गया, तो आने वाले कुछ वर्षों में यह ऐतिहासिक किला पूरी तरह समाप्त हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि पुरातत्व विभाग अगर गंभीरता दिखाए, तो किले का जीर्णोद्धार कर न सिर्फ इस धरोहर को बचाया जा सकता है, बल्कि इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिल सकता है।अब बड़ा सवाल यह है कि संबंधित विभाग कब जागेगा। अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो अरावली की गोद में बसा यह ऐतिहासिक किला केवल इतिहास की किताबों और यादों तक ही सीमित रह जाएगा।
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