करीब 210 मीटर लंबी इस टनल का निर्माण हुआ पूरा।
NHAI को शिमला बायपास परियोजना में एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। मंगलवार को टनल नंबर 5 के दोनों सिरे आपस में मिल गए हैं, जिसे परियोजना की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे शिमला में लगने वाले ट्रैफिक जाम से भी राहत मिलेगी।
NHAI से मिली जानकारी के अनुसार यह टनल शिमला बायपास को इसके अंतिम छोर चलौंठी से जोड़ती है। इसके निर्माण से भविष्य में अटल सुपर स्पेशलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान, चमियाना तक पहुंचना आसान होगा।
टनल का निर्माण गावर और भारत कंस्ट्रक्शन द्वारा किया जा रहा है।
7 महीनों में हुआ निर्माण
करीब 210 मीटर लंबी इस टनल का निर्माण गावर और भारत कंस्ट्रक्शन द्वारा किया जा रहा है। इसका कार्य 22 मई 2025 को शुरू हुआ था और NHAI ने इसे रिकॉर्ड 7 महीनों में, यानी 23 दिसंबर 2025 को पूरा किया है। टनल का निर्माण न्यू ऑस्ट्रियन टनल मेथड (NATM) तकनीक से किया गया है, जिसे वर्तमान में सुरंग बनाने की सबसे प्रभावी तकनीक माना जाता है।
NHAI की 27.457 किलोमीटर लंबी शिमला बायपास परियोजना, चंडीगढ़-शिमला कॉरिडोर का एक महत्वपूर्ण खंड है। इस परियोजना में कुल 5 टनल शामिल हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य जनता की यात्रा को तेज और अधिक सुविधाजनक बनाना है।

NHAI ने इस टनल को रिकॉर्ड 7 महीनों में बनाया है।
यात्रा में एक घंटा कम लगेगा
शिमला बायपास के पूरा होने से शहर में ट्रैफिक जाम कम होगा और शिमला (ढली) पहुंचने में लगने वाला यात्रा समय लगभग एक घंटा कम हो जाएगा। यह परियोजना पर्यटन को बढ़ावा देगी और ऊपरी शिमला जाने वाले स्थानीय लोगों और पर्यटकों को भी सुविधा प्रदान करेगी। साथ ही, सेब सीजन के दौरान बागवान आसानी से अपने उत्पाद मंडियों तक पहुंचा पाएंगे।
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