अगर मौसम बदलते ही लगातार उदासी, डिप्रेशन, नींद की गड़बड़ी, घबराहट या बेचैनी महसूस हो रही है, तो समय रहते मनोवैज्ञानिक से सलाह लेना बेहद जरूरी है. सही समय पर पहचान और इलाज से इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता है.
क्या है एसएडी?
मनोवैज्ञानिक और एसोसिएट मेंबर ऑफ द इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स, इंडिया एर. आर. शंकर ने लोकल 18 पर जानकारी दी है. लोकल 18 पर बताते हैं कि यह एक ऐसा मेंटल डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति का दिमाग मौसम के बदलाव के प्रति जरूरत से ज्यादा संवेदनशील हो जाता है. खासतौर पर हमारे मस्तिष्क का हाइपोथैलेमस (Hypothalamus) सीजन चेंज के साथ सही तरीके से संतुलन नहीं बना पाता, जिससे मानसिक स्थिति बिगड़ने लगती है.
कब और कैसे असर दिखाती है यह बीमारी?
सीजन एफेक्टिव डिसऑर्डर मुख्य रूप से दो समय में देखने को मिलती है. पहला तो सर्दियों की शुरुआत में इसका असर देखने को मिलता है. जब धूप कम हो जाती है तो इस दौरान कई लोग डिप्रेशन में चले जाते हैं. उन्हें ज्यादा नींद आने या बिल्कुल नींद न आने की शिकायत होती है. साथ ही घबराहट, चिड़चिड़ापन और बेचैनी बढ़ जाती है.
दूसरा, गर्मी के मौसम में इसका असर देखने को मिलता है. इस मौसम में तेज गर्मी और उमस मानसिक तनाव को बढ़ा देती है. दिलचस्प बात यह है कि जैसे ही मौसम खत्म होता है वैसे ही इसके लक्षण भी धीरे-धीरे कम होने लगते हैं.
दवा से क्यों नहीं होता जल्दी असर?
एर. आर. शंकर के अनुसार, इस बीमारी में मरीज चाहे कितनी भी एलोपैथिक या आयुर्वेदिक दवाइयों का सेवन कर करें उससे तुरंत राहत नहीं मिलती. कारण यह है कि यह समस्या शारीरिक से ज्यादा मानसिक संतुलन से जुड़ी होती है. इसलिए इसका सबसे प्रभावी इलाज मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और थेरेपी को ही माना जाता है.
किन लक्षणों पर रहें सतर्क?
अगर मौसम बदलते ही लगातार उदासी, डिप्रेशन, नींद की गड़बड़ी, घबराहट या बेचैनी महसूस हो रही है, तो समय रहते मनोवैज्ञानिक से सलाह लेना बेहद जरूरी है. सही समय पर पहचान और इलाज से इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता है.
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जी न्यूज, इंडिया डॉट कॉम, लोकमत, इंडिया अहेड, न्यूज बाइट्स के बाद अब न्यूज 18 के हाइपर लोकल सेगमेंट लोकल 18 के लिए काम कर रहा हूं. विभिन्न संस्थानों में सामान्य खबरों के अलावा टेक, ऑटो, हेल्थ और लाइफ स्टाइल बीट…और पढ़ें
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