Health Tips: डॉ मनोज भगत ने लोकल 18 से कहा कि अगर व्यक्ति अपनी प्रकृति के विपरीत भोजन करता है, तो दोष असंतुलित होकर बीमारियों की वजह बनते हैं. सही आहार अपनाकर शरीर को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रखा जा सकता है और इससे दवाओं पर निर्भरता भी कम होती है.
डॉ मनोज भगत के अनुसार, वातज प्रकृति वाले लोग दुबले-पतले, ज्यादा चलने-फिरने वाले और कम नींद लेने वाले होते हैं. ये ज्यादा बोलते हैं और बैठने पर भी पैर हिलाते रहते हैं. वात बढ़ने पर गैस, कब्ज, जोड़ों का दर्द, सिरदर्द और अनिद्रा जैसी समस्याएं हो सकती हैं. ऐसे लोगों को गर्म और पौष्टिक भोजन करना चाहिए.
पित्तज प्रकृति: तेज दिमाग और गुस्सैल प्रवृत्ति
उन्होंने आगे कहा कि पित्तज प्रकृति वाले लोग बुद्धिमान, आत्मविश्वासी और नेतृत्व क्षमता से भरपूर होते हैं. इन्हें गुस्सा जल्दी आता है और ईगो भी अधिक होता है. पित्त असंतुलन होने पर एसिडिटी, जलन, मुंह में छाले और ज्यादा पसीना आने लगता है. इन्हें ज्यादा मिर्च-मसाले और तला-भुना भोजन से परहेज करना चाहिए.
कफज प्रकृति: शांत स्वभाव और स्थिर बुद्धि
उन्होंने कहा कि कफज प्रकृति वाले लोग शांत, सहनशील और स्थिर बुद्धि के होते हैं. इनका शरीर मजबूत और बाल घने होते हैं. गुस्सा कम आता है लेकिन कफ बढ़ने पर वजन बढ़ना, आलस्य और सर्दी-खांसी की समस्या हो सकती है. ऐसे लोगों को हल्का और गर्म भोजन लेना चाहिए.
आहार ही है स्वस्थ जीवन की कुंजी
डॉ मनोज भगत ने कहा कि यदि व्यक्ति अपनी प्रकृति के विपरीत भोजन करता है, तो दोष असंतुलित होकर बीमारियों का कारण बनते हैं. सही आहार अपनाकर शरीर को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रखा जा सकता है और दवाओं पर निर्भरता भी कम होती है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
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