अंबाला: बदलते वक्त के साथ-साथ छोटे बच्चों को पालन-पोषण का तरीका भी लगातार बदलता जा रहा है. पहले के जमाने में जब किसी घर में बच्चा जन्म लेता था तब मां उसका अपने तरीके से पालन-पोषण किया करती थी, लेकिन आज के जमाने की माताओं की अलग ही सोच है. दरअसल, आज के समय में मां यह सोचती है कि जब तक उसका बच्चा 2 साल का नहीं हो जाता है, तब तक उसको खाने में ना तो नमक देना है और ना ही चीनी देनी चाहिए.
मां के दूध में होते हैं पोषक तत्व
1 साल के बच्चे को क्या खिलाएं
उन्होंने बताया कि शरीर की संरचना इस प्रकार होती है कि आयुर्वेद में हमें छह रस की जरूरत होती है, जिसमें मधुर, अम्ल, लवण, कटु, तिक्त, और कषाय शामिल हैं. उन्होंने बताया कि 1 साल के बच्चे को हर तरह की सब्जी और दाल का टेस्ट करवाया जा सकता है, क्योंकि बच्चा सभी चीज के स्वाद को पहचाने लगता है.
उन्होंने कहा कि आजकल एक खास तरह का ट्रेंड चल रहा है कि शुरू में बच्चों को चीनी और नमक खाने में नहीं देना चाहिए, पर अगर आयुर्वेद के नजरिया से देखे तो क्रिस्टल चीनी (Crystal Sugar) बच्चों को नहीं देनी चाहिए, लेकिन शक्कर और शुद्ध गुड बच्चों को खाने की चीजों में दे सकते हैं. नमक बच्चों को ज्यादा नहीं देना चाहिए, मगर सेंधा नमक खाने की चीजों में डालकर बच्चों को दिया जा सकता हैं.
तीन तरह का होता है बच्चों का नेचर
उन्होंने कहा कि लगभग 6 महीने के बाद बच्चे को खाने की वस्तुओं का टेस्ट (स्वाद) दिलाना जरूरी होता है, क्योंकि जब बच्चा धीरे-धीरे बड़ा होता है, तो वह सभी तरह की सब्जियां और दालें तभी खाता है जब बचपन में उसने उसका स्वाद चखा हो. उन्होंने बताया कि आमतौर पर तीन तरह के नेचर के बच्चे होते हैं, एक वह होते हैं जो घर की बनी चीजें ही खाते है, और दूसरे वह होते हैं जो बाहर की खाने की चीजों को ज्यादा खाना पसंद करते हैं, लेकिन तीसरी श्रेणी में वह बच्चे आते हैं जो बाहर और घर की बनी चीजों को खा लेते हैं. ऐसे बच्चे ही हमेशा तंदुरुस्त रहते हैं.
डिब्बे बंद चीजों से रखें बच्चों को दूर
उन्होंने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों को 1 साल के बाद हर तरह के जूस और हरी सब्जियां व दालें खिलाना शुरू करना है, इसके साथ ही डिब्बे में बंद चीजें बिल्कुल भी नहीं खिलानी है.इसके साथ ही गाय के दूध पीने की आदत बच्चों में बनानी ओर गाय का शुद्ध देसी घी खिचड़ी और सब्जी व रोटी में लगाकर बच्चों को उसका सेवन करवाना है.
छोटे बच्चों को क्या चीजें खिलाएं
उन्होंने कहा कि इसके साथ ही छोटे बच्चों को हर तरह के फल फ्रूट भी खिलाने चाहिए, क्योंकि वह शारीरिक तौर पर मजबूत होने में अहम भूमिका निभाते हैं. इसके साथ ही बच्चों को हरी सब्जियां काटकर उसका वेज सूप बनाकर भी पिला सकते हैं. उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों को फास्ट फूड इत्यादि चीजें खिलाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह वस्तुएं उनके शारीरिक और मानसिक विकास में बाधा बनने का काम करती है.
वहीं सर्दियों के मौसम में 2 साल से ऊपर के बच्चों को अगर सर्दी लग गई है या फिर गला खराब होने के लक्षण दिखे, आप उसे कच्चे शहद और हल्दी पाउडर को बराबर मात्रा में मिलाकर बना हुआ पेस्ट दे सकते हैं. इसमें चुटकी भर काली मिर्च मिला देने से यह और असरदार हो जाता है.
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