हाथियों पर शोध करने वाले मुरारी सिंह ने बताया कि हाथी सामान्यतः सामाजिक और संवेदनशील जीव होते हैं. वे बिना कारण किसी पर हमला नहीं करते. हालांकि, जब वे स्वयं को असुरक्षित महसूस करते हैं या उनके समूह को खतरा होता है, तब वे आक्रामक हो सकते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि इस बार हमला असामान्य रूप से उग्र था.
स्थानीय निवासी रोहित राम ने बताया कि गांव के लोग रोज की तरह भोजन कर विश्राम की तैयारी में थे. अचानक पांच से छह हाथियों का झुंड गांव में दाखिल हुआ और घरों में तोड़फोड़ शुरू कर दी. कच्चे मकान, दरवाजे और खिड़कियां उनके हमले से क्षतिग्रस्त हो गए. शोर सुनकर ग्रामीण जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे. इसी दौरान हाथियों का झुंड उनके घर की ओर बढ़ा. रोहित राम के पिता किसी तरह भागकर अपनी जान बचाने में सफल रहे, लेकिन हाथियों ने उनका पीछा किया और हमला करने की कोशिश की.
हाथियों को कुचल कर मार डाला
रोहित राम ने बताया कि अपनी जान बचाने के लिए उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए घर में रखा इलेक्ट्रिक रूम हीटर हाथी की ओर फेंक दिया. करंट लगते ही हाथी पीछे हट गया और कुछ दूरी पर चला गया. इस बीच वह घर की खिड़की की जाली तोड़कर बाहर निकले और सुरक्षित स्थान की ओर भागे. करीब आधे घंटे बाद जब वे गांव लौटे, तब तक हाथियों का तांडव भयावह रूप ले चुका था. गांव के छह लोगों को हाथियों ने कुचल-कुचल कर मार डाला था. चार लोगों की एक साथ मौत से पूरा गांव शोक और सदमे में डूब गया.
घटना के बाद पूरे गांव में भय और असुरक्षा का माहौल है. ग्रामीण रातभर दहशत में जागते रहे. बच्चों और महिलाओं में विशेष रूप से डर देखा जा रहा है. लोग प्रशासन और वन विभाग से सुरक्षा की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.
बदला लेने के लिए तोड़ा घर
मुरारी सिंह ने यह भी बताया कि पूर्व में भी हजारीबाग जिले में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां हाथियों ने कथित रूप से पुरानी घटनाओं के कारण आक्रामक व्यवहार दिखाया. खासकर पुरानी से पुरानी दुर्व्यवहार का बदला लेने के लिए हाथियों के हमला बोला है. उन्होंने एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए बताया कि जिले के चरही प्रखंड में हाथी ने 25 साल पुराने मामले के लिए बदला लेने के लिए घर तोड़ दिया था. हालांकि, ऐसे मामलों में मानव-वन्यजीव संघर्ष, आवास क्षेत्र में अतिक्रमण और भोजन की कमी जैसे कारण अधिक प्रभावी भी होते हैं.
फिलहाल गोंदवार गांव में मातम पसरा है. प्रशासन की टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रही है. ग्रामीणों की मांग है कि हाथियों के मूवमेंट पर निगरानी बढ़ाई जाए और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा व सुरक्षा प्रदान की जाए.
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