सूर्यकुंड से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं इसे और भी विशेष बनाती हैं. लोक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान यहां कुछ समय निवास किया था. मान्यता है कि माता सीता द्वारा छठ पर्व संपन्न कराने के लिए लक्ष्मण ने अपने वाण से इस कुंड की स्थापना की थी. तभी से यह गर्म जलकुंड निरंतर प्रवाहित हो रहा है.
मंगलवार को इस ऐतिहासिक मेले का विधिवत उद्घाटन स्थानीय विधायक अमित यादव ने किया. उद्घाटन के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग मौजूद रहे. मकर संक्रांति के पावन पर्व पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा और करीब 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने सूर्यकुंड में स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त किया. तड़के सुबह करीब चार बजे से ही स्नान के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं, जो दिनभर जारी रहीं.
सूर्यकुंड से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं इसे और भी विशेष बनाती हैं. लोक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान यहां कुछ समय निवास किया था. मान्यता है कि माता सीता द्वारा छठ पर्व संपन्न कराने के लिए लक्ष्मण ने अपने वाण से इस कुंड की स्थापना की थी. तभी से यह गर्म जलकुंड निरंतर प्रवाहित हो रहा है. इसी कारण यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है.
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी सूर्यकुंड अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, इस क्षेत्र की भूमि के नीचे गंधक की उपस्थिति है, जिसकी रासायनिक प्रक्रिया के कारण यहां का पानी प्राकृतिक रूप से गर्म रहता है. बरकट्ठा स्थित सूर्यकुंड परिसर में कुल पांच कुंड हैं—सूर्यकुंड, रामकुंड, सीताकुंड, लक्ष्मणकुंड और भरतकुंड. सभी कुंडों का तापमान अलग-अलग है, लेकिन मुख्य सूर्यकुंड का तापमान लगभग 88.8 डिग्री सेल्सियस रहता है. खास बात यह है कि कड़ाके की ठंड में भी इसका तापमान स्थिर बना रहता है.
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का मानना है कि नियमित रूप से यहां स्नान करने और सीमित मात्रा में कुंड के जल का सेवन करने से चर्म रोग, अपच और गैस जैसी समस्याओं में लाभ मिलता है. इसी वजह से सालभर लोग यहां स्वास्थ्य लाभ की आशा में स्नान के लिए आते हैं और इसे प्राकृतिक चिकित्सा का केंद्र भी माना जाता है.
उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान विधायक अमित यादव ने श्रद्धालुओं को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं और कहा कि सूर्यकुंड और मेले के समग्र विकास के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे. उन्होंने इसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए कहा कि यह मेला झारखंड की पहचान है. वहीं स्नान के लिए पहुंचे बरही प्रखंड निवासी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि वे हर वर्ष मकर संक्रांति पर सूर्यकुंड आते हैं. उनके अनुसार, हजारीबाग जिले में इसकी भव्यता अद्वितीय है और धार्मिक व वैज्ञानिक दोनों दृष्टि से यह स्थल अत्यंत महत्वपूर्ण है.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें
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