पंचकूला में बॉन्ड पॉलिसी को लेकर डीएमईआर ऑफिस के बाहर एमबीबीएस छात्र। फाइल
हरियाणा के छात्र बॉन्ड पॉलिसी को लेकर एक बार फिर DMER से स्पष्टीकरण चाह रहे हैं। जिसको लेकर वे 11 फरवरी को पंचकूला स्थित डायरेक्टर मेडिकल एंड रिसर्च एजूकेशन के ऑफिस पहुंचे। हरियाणा के एमबीबीएस स्टूडेंट के समर्थन में फैडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएश
हरियाणा के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस छात्रों और राज्य सरकार के बीच बॉन्ड पॉलिसी को लेकर तीन वर्षों के अंतराल के बाद औपचारिक संवाद फिर शुरू हो गया है। पंचकूला स्थित डीएमईआर कार्यालय में डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (DMER) यशेंद्र सिंह के साथ 11 फरवरी को राज्य के चारों सरकारी मेडिकल कॉलेजों का प्रतिनिधित्व करते हुए कुल 12 छात्र प्रतिनिधि बैठक में शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य बॉन्ड पॉलिसी से जुड़े विभिन्न प्रावधानों, उनकी व्यावहारिक चुनौतियों तथा क्रियान्वयन से संबंधित शंकाओं पर स्पष्टता प्राप्त करना था।
फैडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन (FORDA) ने लिखा सीएम व डीएमआईआर को पत्र।
MBBS स्टूडेंट उठा रहे हैं यह मुद्दा
छात्रों की ओर से विस्तृत प्रतिनिधित्व प्रस्तुत किया गया, जिसमें नीति की अवधि और बॉन्ड राशि में कमी करने की मांग रखी गई। साथ ही, बॉन्ड प्रक्रिया में बैंकों की अनिवार्य भागीदारी को समाप्त करने का सुझाव भी दिया गया, ताकि छात्रों और उनके परिवारों पर अनावश्यक वित्तीय दबाव न पड़े। छात्रों ने यह भी आग्रह किया कि नीति के क्रियान्वयन से पहले सभी मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) और सेवा शर्तों को स्पष्ट, लिखित रूप में जारी किया जाए।
बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रारंभिक स्पष्टीकरण प्रदान किए गए। छात्रों ने नियुक्ति की प्रकृति, वेतन संरचना, सेवा शर्तें, पीजी शिक्षा से संबंधित प्रावधान, दस्तावेज़ निर्गमन, तथा अन्य प्रशासनिक पहलुओं पर अपनी शंकाएं सामने रखीं।
फोर्डा ने पत्र में लिखी ये महत्वपूर्ण मांग…
- बॉन्ड की अवधि पर पुनर्विचार करें और उसे तर्कसंगत बनाएं।
- बॉन्ड की राशि की समीक्षा करें और उसे कम करें।
- बैंकों की अनिवार्य भागीदारी समाप्त करें।
- कार्यान्वयन से पहले व्यापक परिचालन दिशानिर्देशों की सूचना दें।
- निष्पक्ष कार्य परिस्थितियों और शैक्षणिक सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करें हमारा दृढ़ विश्वास है कि एक संतुलित, पारदर्शी और छात्र-केंद्रित नीति सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करेगी और साथ ही युवा मेडिकल स्नातकों की आकांक्षाओं और मनोबल को भी बनाए रखेगी।
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