गंगा किनारे बसा हरिद्वार एक पवित्र धार्मिक नगरी है, जहां साल भर करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए पहुंचते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नए साल के पहले दिन हरिद्वार में पूजा आराधना करने से विशेष लाभ मिलता है. ऐसे में अगर आप हरिद्वार आ रहे हैं और कुछ खास व पौराणिक स्थानों के दर्शन करना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए है…
अगर आप नए साल पर हरिद्वार आ रहे हैं और 2026 को सुखद बनाना चाहते हैं, तो यहां धार्मिक अनुष्ठान और धार्मिक कार्य करना बेहद लाभकारी माना जाता है. हरिद्वार यानी भगवान का द्वार। यह एक प्रमुख धार्मिक नगरी है, जहां देश के कोने-कोने से श्रद्धालु और पर्यटक गंगा स्नान व धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए पहुंचते हैं. वेदों, पुराणों और शास्त्रों में हरिद्वार में किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व बताया गया है. गंगा किनारे बसा यह पवित्र शहर पितृ दोष की शांति और ग्रहों की शांति के लिए किए गए उपायों का संपूर्ण फल प्रदान करता है. चलिए जानते हैं…

पहाड़ों से होकर मां गंगा समतल क्षेत्र हरिद्वार में सबसे पहले प्रवेश करती हैं. आदि-अनादि काल में राजा भागीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा, उनके पूर्वजों का उद्धार करने के लिए स्वर्गलोक से धरती पर अवतरित हुई थीं. नए साल पर पितरों-पूर्वजों के उद्धार और धार्मिक अनुष्ठान के लिए हर की पौड़ी का विशेष महत्व बताया गया है. विश्व विख्यात हर की पौड़ी पर साल भर करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु धार्मिक कार्य करने के लिए पहुंचते हैं.

तीर्थ नगरी हरिद्वार में शिवालिक की पहाड़ियों पर स्थित देवी मां का एक चमत्कारी स्थल है. नए साल पर यदि मनसा देवी मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना और देवी मनसा के दर्शन किए जाएं, तो सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और साल भर आरोग्यता बनी रहती है. मनसा देवी एक शक्तिपीठ हैं, जिनका महत्व स्कंद पुराण के केदार खंड में बताया गया है. धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ यहां की यात्रा रोमांच से भी भरपूर है. 1 जनवरी 2026 को देवी मां के दर्शन करने और यहां मन्नत का धागा बांधने का विशेष महत्व बताया गया है.
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नील पर्वत पर स्थित चंडी देवी मंदिर प्रकृति की गोद में बसा एक अद्भुत और अलौकिक स्थल है, जहां साल के पहले दिन दर्शन करने से धार्मिक लाभ के साथ यात्रा भी यादगार बन जाती है. मंदिर तक पहुंचने के लिए कई मार्ग उपलब्ध हैं. आप चाहें तो अपनी यात्रा को खास बनाने के लिए पैदल मार्ग चुन सकते हैं, वहीं 1 जनवरी 2026 को रोपवे के जरिए मंदिर पहुंचकर इस अनुभव को और भी यादगार बना सकते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंडी देवी मंदिर में साल के पहले दिन पूजा-अर्चना करने से पूरे वर्ष देवी मां का आशीर्वाद बना रहता है और अमोघ फल की प्राप्ति होती है.

हरिद्वार में जहां हर की पौड़ी पर धार्मिक अनुष्ठान का विशेष महत्व बताया गया है, वहीं उपनगरी कनखल में भोलेनाथ की ससुराल में स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन और जलाभिषेक करने से साल भर भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है. साल 2026 के पहले दिन पौष शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत किया जाएगा. ऐसे में यदि आप हरिद्वार आ रहे हैं, तो भगवान शिव की ससुराल कनखल में भोलेनाथ का जलाभिषेक मात्र करने से ही साल 2026 आपके लिए बेहद सुखद और अनुकूल रहेगा.

हरिद्वार में जहां हर की पौड़ी का विशेष महत्व है, वहीं उससे कुछ दूरी पर महाभारत काल से जुड़ा एक प्राचीन और दुर्लभ स्थल भी स्थित है. हर की पौड़ी से आगे चलकर भीमगोडा वह स्थान है, जहां पांडवों ने अपनी माता के साथ रात्रि विश्राम किया था. यहां पांडवों की पूजा-अर्चना करने से विशेष लाभ मिलता है. यदि आप हरिद्वार आ रहे हैं, तो महाभारत से जुड़े भीमगोडा में गुप्त गंगा और रेत से बने शिवलिंग के दर्शन भी कर सकते हैं.

यदि आप नए साल पर हरिद्वार घूमने आ रहे हैं और धार्मिक लाभ के साथ प्राचीन स्थलों के दर्शन भी करना चाहते हैं, तो हर की पौड़ी से महज 200 मीटर की दूरी पर स्थित देवी मां का यह स्थान बेहद खास है. हर की पौड़ी से मात्र 5 मिनट की पैदल दूरी पर डाट काली मंदिर स्थित है. नए साल पर देवी मां की आराधना करने से साल भर आरोग्यता बनी रहती है. देवी मां का यह स्थल पहाड़ी के भीतर स्थित है, जिसके समक्ष अंग्रेज भी नतमस्तक हो गए थे.
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