गुमला के डुमरी प्रखंड में स्थित सिरा सीता धाम उर्फ ककड़ोलता आदिवासियों का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल है, जिसका जल सरना धर्म में गंगा जल जितना पवित्र माना जाता है.
इनमें से एक आदिवासियों की प्रमुख स्थल मानी जाने वाली गुमला जिला में स्थित है. जिसे ‘सिरा सीता धाम’ या ‘ककड़ोलता’ के नाम से जाना जाता है. यह आदिवासियों का सबसे बड़ा कुंभ और सबसे बड़ा तीर्थ स्थल माना जाता है. इस ककड़ोलता के जल का प्रयोग आदिवासी समाज के लोग हिन्दू धर्मावलंबी के गंगा जल की तरह पवित्र मानते हैं और उन्हीं के तरह पूजते भी हैं. आदिवासी समाज के लोग इस ककड़ोलता का पानी का प्रयोग जन्म से लेकर मृत्यु तक होने वाले सभी धार्मिक अनुष्ठानों में करते हैं. साथ ही लोगों का मानना है कि यहां के जल को पीने से बड़ी से बड़ी बीमारियों ठीक होती हैं. साथ ही स्नान करने से त्वचा से संबंधित बीमारियां जैसे दाद, खाज, खुजली, और फोड़े आदि ठीक हो जाते हैं.
आदिवासियों के लिए सबसे धार्मिक स्थल
आदिवासी समाज के रमेश उरांव ने लोकल 18 को बताया कि गुमला जिले के डुमरी प्रखंड के आकाशी पंचायत में सिरा सीता नाला उर्फ ककड़ोलता है. ककड़ोलता आदिवासियों की धार्मिक स्थल है और यहां साल भर पानी रहता है. आदिवासियों के लिए सबसे पवित्र जल माना जाता है. जैसे हिंदू धर्म में गंगा जल को पवित्र माना जाता है और सभी धार्मिक अनुष्ठानों में उसका प्रयोग करते हैं. मुस्लिम धर्म में जमजम का पानी पवित्र माना जाता है उसी प्रकार हमारे आदिवासी, सरना धर्म में यहां का पानी आदिवासियों के लिए सबसे पवित्र माना जाता है.
सरना धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक यानी प्रथम संस्कार से लेकर अंतिम संस्कार एवं धार्मिक अनुष्ठानों में इस जल का उपयोग किया जाता है. साथ ही यदि किसी को किसी प्रकार की कोई बीमारी होती है तो यहां का पानी पिलाने और छिड़कने से आराम मिलता है और ग्रह गोचर भी किसी का ठीक नहीं चल रहा तो यहां का पानी पिलाने से ठीक हो जाता है. साथ ही स्किन रोग से जूझ रहे लोगों को यहां का पानी छिड़कने से ठीक हो जाता है.
इस पानी के चमत्कारी फायदे
सरना धर्मावलंबियों के लिए यह स्थल विशेष स्थान रखता है. साथ ही यदि कोई भी व्यक्ति यहां आकर सच्चे मन से किसी भी प्रकार का मन्नत मांगता है. चाहे वह नौकरी, विवाह, संतान, सुख शान्ति, समृद्धि या किसी रोग से संबंधित हो या कोई अन्य मन्नत हो वह जरूर पूरी होती है. यहां की जल की एक और खासियत है कि चाहे कोई भी मौसम हो कितनी भी गर्मी हो या यहां का जल कभी नहीं सूखता है सालों भर यहां पानी रहता है और हमेशा साफ एवं स्वच्छ रहता है और पीने में भी बहुत मीठा लगता है.
वहीं हमारे पूर्वजों का कहना है कि जब प्रलय से पूरी दुनिया का विनाश हो गया था, और इस दुनिया/धरती में कोई नहीं बचा था. तो इसी ककड़ोलता में धर्मेश चाला आयो भाई एवं बहन को छुपा कर रखे थे. सरना धर्मावलंबियों का यह मानना है कि इन्हीं दोनों भाई बहन से दुनिया का सृजन हुआ है.
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