Gumla news: गुमला जिला में बड़े उद्योग धंधे नहीं है और यहां की अधिकांश आबादी कृषि पर आश्रित है.ऐसे में यहां के लोग कृषि के क्षेत्र में भी अच्छा काम करके आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रहे हैं. इसी कड़ी में एक नया अध्याय जुड़ा है. गुमला जिले के कामडारा प्रखंड के तुरबूल डाड़ टोली गांव की रहने वाली हेमावती कुमारी आज आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन की मिसाल बन चुकी हैं.
हेमावती कुमारी पूर्व में हड़िया दारू बेचने का कार्य करती थी. कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन करने वाली हेमावती दीदी की जिंदगी में सरकार द्वारा संचालित फूलो-झानो आशीर्वाद अभियान ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है. उसने अपने परंपरागत हड़िया-शराब के काम को छोड़कर खेती बाड़ी को अपनी आजीविका का माध्यम बनाया .और खेती बाड़ी से अपनी जिंदगी की नई कहानी लिख रही है.

हेमावती दीदी को चांदनी आजीविका सखी मंडल एवं तुरबूल आजीविका ग्राम संगठन से जोड़ा गया . जहां उन्हें सम्मानजनक आजीविका के माध्यम से भी स्थायी आमदनी करने के बारे में समझाया गया . इसके बाद उन्होंने परंपरागत हड़िया-शराब के काम को छोड़कर खेती को अपनी आजीविका का माध्यम बनाया.

सरकार एवं सहयोगी संस्थाओं के समन्वित प्रयास से हेमावती दीदी को आवश्यक प्रशिक्षण एवं संसाधन उपलब्ध कराए गए. लाह की खेती के लिए उन्हें रांची स्थित नामकुम आईसीएआर (ICAR) द्वारा प्रशिक्षण दिया गया, साथ ही टूल किट एवं 5 किलोग्राम लाह बीज उपलब्ध कराया गया. वहीं ओरेकल प्रोजेक्ट के माध्यम से आलू की खेती हेतु 50 किलोग्राम बीज प्रदान किया गया.
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आज हेमावती दीदी अपने घर पर लाह एवं आलू की उन्नत खेती कर रही हैं .एवं उनका मान सम्मान भी बढ़ा है ,साथ ही उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और अब वे आत्मसम्मान के साथ अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं.

गांव की एक दीदी ने फूलो-झानो आशीर्वाद योजना के बारे में बताइए .मैंने उस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया और उसके बाद मैंने लाह की ट्रेनिंग ली .साथ ही टूल किट, लाह बीज आदि सामग्री मिला .जिसके बाद मैंने लाह लगाना शुरू किया और इससे अच्छी आमदनी भी हो रही है.

वहीं इस क्षेत्र में और भी आगे बढ़ने की उम्मीद है.जब हड़िया दारु बेचने का काम करते थे, वह काम करने में ठीक भी नहीं लगता था लेकिन मजबूरी वश करते थे और काफी मुसीबतो का भी सामना करना पड़ता था .लेकिन इस योजना से जुड़ने के बाद जिंदगी में काफी बदलाव आ रही है.

लाह काटना शुरू कर दिए हैं और आलू भी अच्छी हो रही है.उससे उम्मीद है कि अच्छा मुनाफा होगा और आगे इस काम को और भी बड़े पैमाने पर करेंगे और अन्य लोगों को भी जोड़ने का काम करेंगे. वहीं हेमावती दीदी का आगे कहना है कि इस योजना ने मुझे अंधेरे से बाहर निकाला है.

अब मैं सम्मान के साथ खेती कर रही हूं और आत्मनिर्भर जीवन जी रही हूं .यह सफलता की कहानी फूलो-झानो आशीर्वाद अभियान के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन, आजीविका सृजन और महिलाओं के सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण है.
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