पंपापुर सरोवर बहुत ही ऐतिहासिक धरोहर है. पहाड़ की चोटी में तालाब और उस पर पानी होना किसी अजूबा से कम नहीं है. यहां पानी कभी नहीं घटता, लेकिन कलयुग में अत्यधिक गर्मी पड़ रही है. इससे अब यह थोड़ा सूख जाता है. सामान्य दिनों में यहां हमेशा पानी रहता है और यह हमारे लिए गंगा मां जैसा है. इसके बगल में….
स्थानीय पुजारी देवी महतो ने लोकल 18 को बताया कि गुमला जिले के पालकोट प्रखंड के पंपापुर में आप यह जो तालाब देख रहे हैं यह कोई साधारण तालाब नहीं है. यह त्रेता युग का पंपापुर सरोवर है, जो विशाल पहाड़ के ऊपर है और धरातल से लगभग 2,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. यह धार्मिक आस्था से जुड़े होने के साथ-साथ पर्यटक स्थल के रूप में भी जाना जाता है.
पंपापुर सरोवर बहुत ही ऐतिहासिक धरोहर है. पहाड़ की चोटी में तालाब और उस पर पानी होना किसी अजूबा से कम नहीं है. यहां पानी कभी नहीं घटता, लेकिन कलयुग में अत्यधिक गर्मी पड़ रही है. इससे अब यह थोड़ा सूख जाता है. सामान्य दिनों में यहां हमेशा पानी रहता है और यह हमारे लिए गंगा मां जैसा है. इसके बगल में एक कुआं है जो कभी नहीं सूखता है. यह गुमला जिले के लिए किसी वरदान या अजूबे से कम नहीं है. यह पर्यटन स्थल के रूप में भी जाना जाता है. इसे देखने के लिए काफी दूर-दूर से लोग आते हैं.
विशाल पहाड़ के ऊपर पेड़-पौधे ,तालाब, कुआं, मंदिर, आश्रम स्थित है. यह शहर के कौतूहल से दूर शांत और शुद्ध वातावरण में स्थित है. उन्होंने आगे कहा कि यहां रामायण काल में भगवान राम आए थे. यहां माता शबरी का आश्रम और मतंग ऋषि का आश्रम आज भी साक्ष्य के रूप में मौजूद है. उन्होंने आगे कहा कि यहां मरवालता गुफा है. वहां मतंग ऋषि का शंख प्राप्त हुआ था जो आज भी साक्ष्य के रूप में मौजूद है जिसे मां पंपापुर भवानी के मंदिर में रखा गया है. उसकी पूजा-पाठ भी की जाती है.
यहां उड़ीसा,बिहार ,बंगाल ,छत्तीसगढ़ , झारखंड के विभिन्न इलाके से लोग आते हैं. यहां तक की राजस्थान, नेपाल से भी लोग आते हैं. कुछ दिन पूर्व यहां नेपाल से एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला इस पंपापुर सरोवर को देखने के लिए आई थी और इस गंगा मां का दर्शन करके सकुशल वापस लौट गईं.
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