Bilaspur News: लोग पूरे पौधे को जड़ समेत खरीदते हैं, जिससे इसका वजन भी ज्यादा होता है और बीज खाने योग्य रहते हैं. सर्दी के मौसम में इसकी मांग ज्यादा रहती है, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा हो जाता है.
किसान जदूनंदन वर्मा लोकल 18 को बताते हैं कि चने की खेती से पहले उन्होंने खेत की तैयारी पर ज्यादा खर्च नहीं किया. उनके पास एक छोटी पावर वीडर मशीन है, जिससे खेत की जुताई कर ली गई. इसके साथ ही खेत में नीम की खली डाली गई, जिससे मिट्टी की सेहत सुधरी और कीट और रोगों से भी बचाव हुआ.
बाजार में बिकने वाले चने बीज से की खेती
उन्होंने बताया कि चने की बुवाई के लिए किसी हाइब्रिड बीज का उपयोग नहीं किया गया. बाजार में खाने के लिए बिकने वाला मोटे दाने का चना लिया गया और उसे ट्राइकोडर्मा से उपचारित कर बुवाई की गई. बीज उपचार के कारण फसल स्वस्थ रही और रोगों का असर कम देखने को मिला.
कच्चा चना ‘बुट’ बना कमाई का जरिया
जब चना की फसल अच्छी होती है और दाने मोटे रहते हैं, तो कच्चे चना को ‘बुट’ के रूप में बेचने पर अच्छा दाम मिलता है. किसान बताते हैं कि लोग पूरे पौधे को जड़ सहित खरीदते हैं, जिससे वजन भी ज्यादा होता है और बीज खाने योग्य रहता है. ठंड के मौसम में इसकी मांग अधिक रहती है, जिससे किसानों को बेहतर मुनाफा मिल जाता है.
किसानों को दोहरा लाभ
चने की खेती से किसानों को दोहरा लाभ मिलता है. एक ओर जहां कच्चा चना बुट के रूप में बेचने से अच्छी आमदनी होती है, वहीं दूसरी ओर चना फसल मिट्टी में नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करती है. खेत में झड़ने वाली पत्तियां प्राकृतिक खाद का काम करती हैं, जिससे मृदा की उपजाऊ शक्ति बनी रहती है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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